असम से अहमदाबाद तक बनाई पहचान, सिद्धि ग्रुप के संस्थापक थे
मोदी ने ऊर्जा संरक्षण, कलाम ने सेवाओं के लिए किया सम्मानित
नवलगढ़/अहमदाबाद। शेखावाटी जनपद के नवलगढ़ कस्बे में जन्मे प्रतिष्ठित उद्योगपति, समाजसेवी और दानवीर श्री गोविंदराम बासोतिया का देहावसान हो गया है । उनके निधन की खबर से उद्योग जगत, सामाजिक संगठनों और प्रवासी राजस्थानी समाज में शोक की लहर दौड़ गई, वे सेवा, संस्कार और परोपकार की विरासत छोड़ गए हैं ।
असम से शुरू की, सिद्धि ग्रुप तक पहुंचे सफर

झुंझुनूं जिले के नवलगढ़ कस्बे में जन्मे बासोतिया ने व्यावसायिक जीवन की शुरुआत असम से की, मेहनत और दूरदर्शिता के दम पर उन्होंने वस्त्र और कॉटन यार्न उद्योग में बड़ी पहचान बनाई। असम में कॉटन यार्न के प्रमुख नेता माने जाते थे। उद्योगपति बसंत कुमार बिड़ला के निकट सहयोगियों में उनकी गिनती होती थी। बाद में अहमदाबाद को कर्मभूमि बनाकर उन्होंने सिद्धि ग्रुप ऑफ इंडस्ट्रीज की स्थापना की। उनके नेतृत्व वाले कॉटन यार्न उद्योगों ने न सिर्फ आर्थिक विकास में योगदान दिया, बल्कि सैकड़ों लोगों को रोजगार भी दिया। वे कहते थे – “उद्योग सिर्फ मुनाफे का जरिया नहीं, समाज निर्माण का साधन भी है।”
ऊर्जा संरक्षण के लिए मिले राष्ट्रीय सम्मान

ऊर्जा संरक्षण और औद्योगिक दक्षता के क्षेत्र में उनके काम को राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया। गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में राज्य सरकार ने उन्हें ऊर्जा संरक्षण के उत्कृष्ट कार्यों के लिए सम्मानित किया। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम ने भी उनकी सेवाओं के लिए उन्हें सम्मानित किया।
जन्मभूमि से जुड़ाव कभी नहीं टूटा
अपार सफलता के बाद भी उनका नवलगढ़ और राजस्थान से भावनात्मक जुड़ाव बना रहा। वे नियमित नवलगढ़ आते थे। अपने खर्चे से वहां सड़क और सार्वजनिक निर्माण करवाए। राजस्थान की कई गौशालाओं को आर्थिक मदद दी। कोरोना काल में जरूरतमंद परिवारों की सहायता की। शिक्षा के लिए भी वे आगे रहे। विप्र फाउंडेशन के राष्ट्रीय संरक्षक के तौर पर जयपुर के श्री परशुराम ज्ञानपीठ में कन्या छात्रावास के लिए एक पूरा विंग बनवाया। गरीब और प्रतिभाशाली छात्रों को छात्रवृत्ति देते थे। गौड़ ब्राह्मण संघ राजस्थान के संरक्षक रहे बासोतिया को “शेखावाटी के सपूत” और “शेखावाटी रत्न” से नवाजा गया। उनके निधन को उद्योग और समाजसेवा के एक युग का अंत माना जा रहा है। देशभर के उद्योगपतियों और सामाजिक संगठनों ने गहरा शोक जताया है।


