जयपुर। राजस्थान हाईकोर्ट ने जयपुर के रामगढ़ बांध के पुनर्जीवन को लेकर राज्य सरकार को गंभीरता से काम करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि यदि सरकार में इच्छाशक्ति हो तो रामगढ़ बांध को दोबारा जीवित किया जा सकता है। मामले की सुनवाई सोमवार को कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायाधीश भुवन गोयल की खंडपीठ ने की। अदालत ने जल संसाधन, सिंचाई, राजस्व विभाग के सचिवों तथा जयपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए) के अधिकारियों को 23 जुलाई को पुनर्जीवन योजना के साथ व्यक्तिगत रूप से अथवा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित होने का आदेश दिया।
सुनवाई के दौरान न्यायमित्र अभिनव शर्मा ने अदालत को बताया कि मौके पर कोई ठोस कार्य नहीं हुआ है। प्राकृतिक जल प्रवाह बाधित हो चुका है और कैचमेंट क्षेत्र की भौगोलिक स्थिति (टोपोग्राफी) का वैज्ञानिक अध्ययन आवश्यक है। इस पर अदालत ने कहा कि बांध क्षेत्र में अतिक्रमण, अवैध आवंटन, ट्रेंच निर्माण और पक्की दीवारें खड़ी होने से स्थिति गंभीर हो गई है।
स्थानीय नागरिकों की ओर से अधिवक्ता करण राठौड़ ने पक्षकार बनने के लिए आवेदन प्रस्तुत किया। उनकी ओर से अधिवक्ता अंशुमन सक्सेना ने बताया कि नागरिक स्तर पर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं और रामगढ़ बांध के पुनर्जीवन के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता राजेन्द्र प्रसाद ने अदालत को पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।
इस बीच, विधानसभा में जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत द्वारा रामगढ़ बांध को बचाने के लिए दिए गए आश्वासनों और गठित समितियों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। मंत्री ने जेडीए और राजस्व विभाग द्वारा होटल, रिसोर्ट, खेती तथा अन्य निर्माण कार्यों के लिए जारी अनापत्ति प्रमाण पत्रों (एनओसी) की जांच कराने का आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक पिछले पांच वर्षों में जारी एनओसी का पूरा ब्यौरा सार्वजनिक नहीं हो सका है। वहीं रोड़ा और माधोवेणी नदी के बहाव क्षेत्र में अतिक्रमण लगातार बढ़ते रहे हैं।
सरकार ने भी रामगढ़ बांध की मौजूदा स्थिति पर चिंता जताई है, लेकिन जल संसाधन विभाग की समिति दो वर्ष बीत जाने के बाद भी वर्ष 2024 से पहले के पांच वर्षों में जेडीए और राजस्व विभाग द्वारा जारी एनओसी की जांच रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं कर सकी है। रिपोर्ट लंबित रहने के कारण अतिक्रमणों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई भी आगे नहीं बढ़ पा रही है।
रामगढ़ बांध पुनर्जीवन पर हाईकोर्ट सख्त, 23 जुलाई को अधिकारियों को तलब

