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Raj Media Times > Blog > Jaipur > राजस्थान की धरती ने भारत की सैन्य परंपरा को आगे बढ़ाया- केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह
Jaipur

राजस्थान की धरती ने भारत की सैन्य परंपरा को आगे बढ़ाया- केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह

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Last updated: January 16, 2026 6:08 am
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जयपुर। केन्द्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सेना दिवस मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व समर्पित करने वाले जवानों के अदम्य साहस, अटूट समर्पण और अप्रतिम बलिदान की गाथा को स्मरण करने का दिन है। इन्हीं के कारण आज पूरा भारत सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि राजस्थान के कण-कण में वीरता की गाथाएं समाई हैं। शौर्य, पराक्रम और त्याग की अमर कहानियों से यहां का इतिहास भरा हुआ है। राजस्थान की धरती ने हमेशा भारत की सैन्य परंपरा को आगे बढ़ाया है एवं इसे शक्ति तथा गरिमा भी प्रदान की है।
सिंह गुरुवार को 78वें सेना दिवस के अवसर पर सवाई मानसिंह स्टेडियम में आयोजित किए गए शौर्य संध्या कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राजस्थान के वीरों ने भारत माता की सेवा में अपना रक्त बहाया है। महाराणा प्रताप की तलवार से लेकर राणा सांगा के शौर्य तक, पन्नाधाय के त्याग से लेकर मीराबाई की भक्ति तक और भामाशाह की संपत्ति तक इस भूमि ने हर क्षेत्र में अद्भुत पुरूषार्थ का परिचय दिया है।

शौर्य भूमि पर शौर्य संध्या का आयोजन सैनिकों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि-
रक्षा मंत्री ने कहा कि राजस्थान के सभी समुदायों के वीरों ने सेना में अपनी अमिट छाप छोड़ी है। आज भी राजस्थान के युवा सेना की विभिन्न रेजिमेंट में सेवारत होकर देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान के ऐतिहासिक किलों, महलों और स्मारकों ने सैकड़ों वर्षों से सैन्य क्षमता, रणनीति और साहस का पोषण किया है। ऐसी शौर्य भूमि पर शौर्य संध्या का आयोजन वीर सैनिकों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।
15 जनवरी का दिन स्वाभिमान और स्वाधीनता का प्रतीक –
सिंह ने कहा कि 15 जनवरी का दिन भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों से अंकित है। वर्ष 1949 में भारतीय सेना ने पहली बार भारतीय सेना अध्यक्ष के नेतृत्व में कदम रखा। जनरल के.एम. करियप्पा ने भारतीय सेना के पहले कमाण्डर इन चीफ के रूप में पदभार ग्रहण किया। उन्होंने कहा कि यह घटना औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति का, स्वाभिमान और स्वाधीनता की प्रतीक थी। तक से लेकर आज तक यह दिवस हमारे लिए संकल्प का दिवस है।
ऑपरेशन सिंदूर ने सैन्य ताकत के साथ राष्ट्रीय स्वभाव का परिचय दिया-
रक्षा मंत्री ने कहा कि यह दिवस हमारे आत्ममंथन का भी अवसर है। हमारे लिए सब कुछ न्यौछावर करने वाले रक्षकों के प्रति कृतज्ञता और सम्मान का भाव निरंतर चला आ रहा है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने सिर्फ अपनी सैन्य ताकत ही नहीं दिखाई बल्कि अपने राष्ट्रीय स्वभाव का भी परिचय दिया। आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई पूरी तरह से सोच समझ कर और मानवीय मूल्यों को ध्यान में रखकर की गई।
ऑपरेशन सिंदूर को साहस और संतुलन के रूप में रखा जाएगा याद-
सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर को भारत के इतिहास में सिर्फ सैन्य कार्रवाई के रूप में नहीं बल्कि साहस और संतुलन के प्रतीक के रूप में याद रखा जाएगा। ऑपरेशन सिंदूर अभी पूरी तरह से समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि जब तक आतंकी सोच खत्म नहीं होती तब तक शांति के लिए हमारा यह प्रयास लगातार चलता रहेगा। उन्होंने राजस्थान की धरती से इसकी घोषणा की।
भारतीय सैनिक दार्शनिक और कुशल प्रबंधक भी-
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय सैनिक सिर्फ योद्धा नहीं होता बल्कि एक दार्शनिक और कुशल प्रबंधक भी होता है क्योंकि सैनिक का जीवन दर्शन ‘‘सेवा परमो धर्मः’’ पर आधारित है। सैनिक अपना सब कुछ त्यागकर राष्ट्र की सेवा को समर्पित होता है। हमारे शास्त्रों में वर्णित निःस्वार्थ सेवा का सबसे बड़ा उदाहरण सैनिक का जीवन है। उन्होंने कहा कि सैनिक अपने दुश्मन के प्रति कठोर होता है। वहीं, आत्मसमर्पण कर चुके शत्रु के प्रति और पीड़ित नागरिक के प्रति उसका हृदय कोमलता से भरा होता है।
सैनिक से सीखें निस्वार्थ सेवा का गुण-
सिंह ने कहा कि भारतीय सैनिक के लिए उसका कर्त्तव्य यज्ञ के समान होता है और उसका त्याग उसकी आहूति होती है। सैनिक अच्छे से जानता है कि उसके सभी कर्मों का फल व्यक्तिगत नहीं बल्कि सम्पूर्ण राष्ट्र की सुरक्षा और समृद्धि के रूप में प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि यह निःस्वार्थ सेवा का उच्चतम आदर्श है जिसकी परिकल्पना हमारे ऋषियों ने की। उन्होंने नागरिकों और युवाओं से सैनिक के राष्ट्र की निस्वार्थ सेवा का गुण सीखने की अपील की।
युवा सेना में देश के लिए जीना सीखता है-
रक्षा मंत्री ने कहा कि सैनिक कुशल प्रबंधक भी होता है क्योंकि सैनिक का संबंध सिर्फ युद्ध से ही नहीं होता, वह प्रतिदिन इसकी तैयारी भी करता है। साधारण युवा जब सेना में प्रवेश करता है तो उसके अंदर क्रांतिकारी परिवर्तन देखने को मिलते हैं। सेना में उसे स्वयं को छोड़कर देश के लिए जीना सिखाया जाता है। समय का महत्व भी समझाया जाता है। सैनिक को शारीरिक कष्ट सहने की क्षमता विकसित करनी होती है और गर्मी, सर्दी व रेगिस्तान की परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालना भी होता है। साथ ही, उसे टीमवर्क भी सिखाया जाता है।
भारतीय सेना विविधता में एकता का सजीव उदाहरण-
सिंह ने कहा कि सेना में ‘मैं’ नहीं ‘हम’ होता है। इसमें व्यक्तिगत कुछ न होकर सब कुछ सेना का होता है। कोई भी निर्णय व्यक्तिगत न होकर सामूहिक होता है। सेना का प्रशिक्षण सैनिक को अकुशल से कुशल बना देता है। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना देश व नागरिकों के लिए मिसाल है, इसमें पूरा भारत नजर आता है। वहीं, भारतीय सेना विविधता में एकता का सजीव उदाहरण भी है। इसमें देश के कोने-कोने से आए नौजवान अलग-अलग भाषा, खान-पान और पहनावे के बाद भी साझा लक्ष्य के लिए एकजुट होकर दुश्मन का मुकाबला करते हैं।
भारतीय सेना-राष्ट्र निर्माण का प्रमुख स्तंभ-
रक्षा मंत्री ने कहा कि सेना की रेजिमेंट्स में विभिन्न राज्यों के नौजवान साथ-साथ एक-दूसरे के त्योहार मनाते हैं। एक-दूसरे की भाषा सीखते हैं और संकट में सहायक भी बनते हैं। सेना ने भारत की सामाजिक एकता को मजबूत बनाने में अतुल्य योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना सिर्फ सैन्यबल नहीं है बल्कि यह राष्ट्र निर्माण का भी प्रमुख स्तंभ है। भारत में सीमाक्षेत्र के अलावा हर क्षेत्र में भी सेना नागरिकों के साथ मिलकर काम करती है। जनता का सेना पर अटूट विश्वास है और यह विश्वास ही सेना की सबसे बड़ी ताकत है।
भारतीय सेना दुनिया के लिए शांतिदूत बनकर उभरी-
सिंह ने कहा कि सैनिक जानते हैं वह जिस जनता की रक्षा कर रहे हैं, वह उनके परिवार का हिस्सा हैं। इसी प्रकार, जनता भी जानती है कि उनके सैनिक कभी उन्हें निराश नहीं कर सकते। यह पारस्परिक विश्वास का बंधन ही हमारे राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे की नींव है। उन्होंने कहा कि हमारे सैनिकों ने किसी भी देश में आवश्यकता पर नागरिकों की चिकित्सकीय मदद, बुनियादी ढांचे का विकास और मानवीय मदद भी प्रदान की है। हमारी सेना दुनिया के लिए शांतिदूत बनकर उभरी है। इससे भारत की ‘वसुधैवः कुटुम्बकम्’ की भावना को बल मिला है।
सेना की मजबूती, आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भरता बेहद जरूरी-
रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय सेना ने रिफॉर्म्स को तेजी से लागू किया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हम भारतीय सेना को दुनिया की सबसे सशक्त सेना बनाने की ओर अग्रसर हैं और वर्ष 2047 तक यह लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि दुनिया की मौजूदा स्थितियों से हम सभी परिचित हैं और स्थापित धारणाएं टूट रही हैं। दुनिया अनिश्चितताओं से गुजर रही है। ऐसे में यह स्पष्ट है कि सेनाओं की मजबूती, आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भरता किसी भी देश के अस्तित्व के लिए आज बेहद महत्वपूर्ण है। वर्तमान स्थितियों में सेनाओं का मजबूत रहना सबसे सर्वोपरि है।
सेना में महिलाओं की भूमिका को बढ़ाने के हुए सकारात्मक प्रयास-
सिंह ने कहा कि इंटर सर्विसेज को भी लगातार मजबूत बनाना होगा क्योंकि जिस प्रकार युद्ध के आयामों का विस्तार हो रहा है, उसे देखते हुए अब कुछ भी अप्रत्याशित नहीं रह गया है। उन्होंने कहा कि हमारी सेनाएं हमारी प्राथमिक ताकत हैं। इसलिए इसका सबके साथ फॉरवर्ड लुकअप कॉलेब्रेशन आवश्यक है। हमने प्रधानमंत्री के विजन से सेनाओं में महिलाओं की भूमिका को बढ़ाने के भी सकारात्मक प्रयास किए हैं। हमने आर्मी में शॉर्ट सर्विस कमीशन से कमीशन्ड महिलाओं को परमानेंट कमीशन में बदलने का प्रावधान कर दिया है। साथ ही, नेशनल डिफेंस एकेडमी में वर्ष 2021 से बेटियों के एडमिशन की भी शुरूआत की है।
सेना नौकरी से बढ़कर सम्मान और देश सेवा का अवसर-
रक्षा मंत्री ने युवाओं से अपील करते हुए कहा कि सेना एक नौकरी से कई गुना बढ़कर है। देश के प्रति प्रेम और व्यक्तित्व को मजबूत बनाने की इच्छा रखने वाले युवाओं के लिए सेना सर्वोत्तम क्षेत्र है। उन्होंने कहा कि सेना में केवल शारीरिक बल ही पर्याप्त नहीं है बल्कि मानसिक क्षमता, नैतिक साहस एवं निर्णय क्षमता जैसे गुणों की भी आवश्यकता होती है। सभी युवा इन गुणों को विकसित करें, शिक्षा पर ध्यान दें और देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझें। सेना युवाओं को एडवेंचर, सम्मान और देश सेवा का अवसर देने के साथ उज्जवल भविष्य भी प्रदान करती है।
प्रधानमंत्री के नेतृत्व में सैन्य क्षमताओं को बनाया सशक्त-
सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में हमने हमेशा राष्ट्रीय सुरक्षा और सेनाओं की क्षमताओं को सशक्त बनाने का काम किया है। देश की सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हुए सेना की मजबूती के लिए कोई भी आवश्यक खर्च करने से पहले अब संकोच नहीं किया जाता है। जीवन के अमूल्य वर्ष राष्ट्र की सेवा को समर्पित करने करने वाले भूतपूर्व सैनिकों के प्रति भी हमारी प्रतिबद्धता है। इसी क्रम में 14 जनवरी को वेटरन्स डे के अवसर पर पर पूर्व सैनिकों से मिलकर बेहद खुशी हुई। उन्होंने कहा कि हमारे सैनिकों ने हमारे लिए जो कुछ भी किया, इसलिए उनके परिवारों का ख्याल रखना हमारा कर्तव्य है।
आर्मी डे परेड मंे ऑपरेशन ‘सिंदूर’ एवं अन्य सैन्य अभियानों में अदम्य साहस और वीरता का प्रदर्शन करने वाले सूबेदार मेजर पवन कुमार, हवलदार सुनील कुमार सिंह, लांस नायक दिनेश कुमार, लांस नायक सुभाष कुमार और लांस नायक प्रदीप कुमार को मरणोपरांत ‘सेना मेडल (गैलेंट्री)’ से सम्मानित किया गया। शौर्य संध्या कार्यक्रम में रक्षा मंत्री ने इन वीर शहीदों की वीरांगनाओं का सम्मान किया।
भारतीय सेना-शौर्य एवं बलिदान की परंपरा की थीम पर आयोजित इस कार्यक्रम में रक्षा मंत्री ने स्पेशल कवर का भी अनावरण कर डिजिटल हस्ताक्षर किए। रक्षा मंत्री सिंह ने प्रोजेक्ट नमन के तहत सूरतगढ़ में 100वें नमन सेंटर का भी वर्चुअल उद्धाटन किया।
भारत की ताकत का प्रदर्शन है ऑपरेशन सिंदूर- मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राजस्थान शौर्य, भक्ति और शक्ति की भूमि है। राजस्थान को वीर सपूतों के लिए जाना जाता है। राजस्थान की धरती मां भारती की रक्षा करने में सदा तत्पर रही है। उन्होंने कहा कि देश की सबसे लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा राजस्थान में है और यहां का हर घर सेना के प्रति समर्पण से भरा है।
शर्मा ने कहा कि राजस्थान के योद्धाओं ने सदियों से भारत की सीमाओं की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहुति दी है। बप्पा रावल से लेकर महाराणा प्रताप तक, राणा कुंभा, राणा सांगा और पृथ्वीराज चौहान जैसे महान योद्धाओं ने विदेशी आक्रमणकारियों को धूल चटाई। उन्होंने कहा कि परमवीर चक्र विजेता पीरू सिंह, मेजर शैतान सिंह और लेफ्टिनेंट जनरल सगत सिंह जैसे वीर सपूतों ने राजस्थान का नाम इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित किया है। उन्होंने कहा कि राजस्थान के युवा एनडीए, सैनिक स्कूल व रक्षा अकादमियों में बड़ी संख्या में चयनित होते हैं। यहां के गांवों और कस्बों से युवा सेना में भर्ती होने का सपना देखते हैं और देश सेवा को अपना सौभाग्य मानते हैं।
सेना दिवस परेड को राष्ट्रीय पर्व की तरह मनाया-
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह आयोजन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एवं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की दूरदर्शी सोच को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। जिसके अंतर्गत सैन्य आयोजनों को दिल्ली से बाहर ले जाकर देश की आम जनता तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि वीरों की मातृभूमि राजस्थान में सेना दिवस परेड का आयोजन हुआ है तथा इसे एक उत्सव और राष्ट्रीय पर्व की तरह मनाया गया है।
सेना दिवस परेड के लिए आयोजित कार्यक्रमों ने जनमानस को जोड़ा-
शर्मा ने कहा कि सेना दिवस परेड के लिए विगत एक माह में सम्मान दौड़, साइकिल रैली, कर्टन रेजर, चिकित्सा शिविर, अपनी सेना को जानिए, सेना दिवस परेड और शौर्य संध्या जैसे विविध आयोजनों ने जनमानस को सेना से सीधे जोड़ने का कार्य किया। उन्होंने कहा कि इन कार्यक्रमों को 15 लाख से अधिक लोगों ने प्रत्यक्ष रूप से देखा और करोड़ों लोगों ने डिजिटल माध्यमों से इसका साक्षात्कार किया। यह आयोजन देशभक्ति, राष्ट्रीय एकता और भारत की अदम्य शक्ति का प्रतीक है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद आर्मी डे परेड सेना की जीत का जश्न-
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सेना की ताकत और संकल्प का जीवंत उदाहरण है। इसने पूरी दुनिया को दिखाया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद यह पहली आर्मी डे परेड है जो हमारी सेना की जीत का जश्न है। इस परेड में ऑपरेशन सिंदूर में प्रयुक्त अत्याधुनिक हथियारों का प्रदर्शन किया गया है।
पूर्व सैनिकों के सम्मान और कल्याण के लिए प्रतिबद्ध-
शर्मा ने कहा कि हमारी सरकार पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के सम्मान और कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। द्वितीय विश्व युद्ध के नॉन-पेंशनर पूर्व सैनिकों की पेंशन 10 हजार से बढ़ाकर 15 हजार रुपये प्रति माह की गई है। उन्होंने कहा कि वीर बलिदानियों के सम्मान में 43 विद्यालयों का नामकरण और बीकानेर में शहीदों के आश्रितों को 750 बीघा भूमि का आवंटन किया गया है।
पूर्व सैनिकों के लिए जिला स्तर पर 418 समाधान शिविरों का आयोजन-
मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलवामा हमले में वीरगति प्राप्त केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल के 5 कार्मिकों की आश्रित वीरांगनाओं को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर आवास प्रदान किए। पूर्व सैनिकों के लिए नया वेब पोर्टल और जिला स्तर पर 418 समाधान शिविरों का आयोजन किया। उन्होंने कहा कि संविदा पर कार्यरत पूर्व सैनिकों के मानदेय में लगातार 10-10 प्रतिशत की वृद्धि की गई है तथा ब्यावर, खैरथल-तिजारा एवं फलौदी में जिला सैनिक कल्याण कार्यालय स्थापित किये गये हैं।
सेना के साथ खड़े रहें चट्टान की तरह-
शर्मा ने कहा कि सेना दिवस परेड को देखकर युवाओं के अंदर राष्ट्र प्रथम की भावना जागृत हुई है। सेना में करियर देश सेवा के साथ संचार, साइबर सुरक्षा और एयरोस्पेस जैसे क्षेत्रों में भी असीमित अवसर देता हैं। उन्होंने सेना के साथ सदैव चट्टान की तरह खड़े रहने और राष्ट्र की एकता और अखंडता के लिए मिलकर कार्य करने का संकल्प लेने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने माइनस डिग्री तापमान से लेकर तपते रेगिस्तान तक हमारी रक्षा में खड़े भारतीय सेना के वीर जवानों को नमन किया।
भारतीय सेना की शौर्य गाथा से दर्शक हुए अभिभूत-
78 वें सेना दिवस के अवसर पर आयोजित शौर्य संध्या में भारतीय सेना की शौर्य गाथा ने दर्शकों को रोमांच और गर्व से अभिभूत कर दिया। कार्यक्रम में नेपाल सेना के बैंड, पैरामोटर फ्लाईपास्ट तथा कलरीपयट्टु और मल्लखंब की प्रभावशाली प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। वहीं, ऑपरेशन सिंदूर से संबंधित प्रस्तुति भी कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रही। साथ ही, भव्य ड्रोन शो में राष्ट्रीय और ऐतिहासिक विषयों पर आधारित मनमोहक आकृतियों को भी लोग एकटक निहारते रहे। आकाश में सजीव आकृतियों के माध्यम से राष्ट्रगान की अद्भुत प्रस्तुति के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
शौर्य संध्या कार्यक्रम को देखने के लिए राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े, मिजोरम के राज्यपाल जनरल (रि.) वीके सिंह, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, थल सेना अध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी, सप्तशक्ति कमान के सेना कमाण्डर लेफ्टिनेंट जनरल मनजिंदर सिंह, विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी, डॉ. प्रेमचंद बैरवा, मंत्रिपरिषद के सदस्यगण, सांसद मदन राठौड़, विधायकगण सहित भूतपूर्व सेना अध्यक्ष, नौसेना अध्यक्ष, केन्द्र व राज्य सरकार के अधिकारीगण, भूतपूर्व सैनिक, वीर नारियों सहित बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे।

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