जयपुर। माहेश्वरी जाति के इतिहास, उत्पत्ति और सांसकृतिक विरासत को केंद्र में रखकर समाजसेवी एवं शोधकर्ता चंद्रमोहन शारदा द्वारा निर्मित 20 मिनट की शोधपरक फिल्म माहेश्वरी वंशोदय का निर्माण किया गया। प्रमाणिक ऐतिहासिक तथ्यों और विस्तृत अध्ययन पर आधारित इस फिल्म को सामाजिक और सांरकृतिक हलकों में सराहा जा रहा है। इसे माहेश्वरी जाति के इतिहास पर तैयार पहली विस्तृत ‘शोधपरक फिल्म माना जा रहा है।
ए-आई निर्मित फिल्म में माहेश्वरी जाति की महाभारत काल में हुईं उत्पत्ति से जुड़ी पौराणिक कथाओं, भगवान शिव से संबंधित मान्यताओं, खंडेला और लोहर्गल जैसे ऐतिहासिक सथलों तथा 72 मूल खापों का उल्लेख किया गया है। प्रस्तुति को प्रमाणिक बनाने के लिए प्राचीन ग्रंथो, जागाओ ‘ की बहियां, लोक मान्यताओं और समाज में प्रचलित एतिहासिक संदर्भों का अध्ययन किया गया है ।

फिल्म के दृश्यांकन में आधुनिक तकनीक और पारंपरिक भारतीय सांस्कृतिक सौंदर्य का संतुलित उपयोग किया गया है। मंदिरों , राजप्रसादों और ऐतिहासिक परिवेश को दृश्यात्मक रूप से प्रभावशाली ढंग से प्रसतुत किया गया है जिससे दर्शकों को इतिहास से जुड़ाव महसू्स होगा ।
समाजसेवी व भामाशाह निर्मल मूंदड़ा ने बताया कि बदलते समय में नई पीढ़ी अपनी जाति के इतिहास और परंपराओं से दर होती जा रही है। ऐसे में यह फिल्म युवाओं को अपनी जडों, संस्कृति और गौरवशाली विरासत से परिचित कराने का प्रयास है। फिल्म केबारे में विभिन्न सामाजिक संगठनों और समाज के प्रषुद्धजनोंने इसे एक महत्वपूर्ण दस्तावेज की पहल बताया है। उनका मानना है कि यह प्रयास आने वाल
समय में समाज के इतिहास को संरक्षित रखने में उपयोगी सिद्ध होगा।
फिल्म का प्रसारण समाज के भामाशाह ज्योति कुमार माहेश्वरीद्वारा महेश नवमी से पूर्व किया जाएगा। फिल्म का लिंक सोशल मीडिया के द्वारा देश और विदेश के माहेश्वरी संगठनों तथा ग्रुप के माध्यम से माहेश्वरी परिवारो तक पहुंचाया जाएगा, साथ ही आव्हान किया जाएगा कि आगामी 2३ जून को महेश नवमी जाति उत्पत्ति दिवस के अवसर पर पूजा -अर्चना से पूर्व अपने-अपने स्थान पर फिल्म का प्रदर्शन कर पूर्वजों के जीवन चरित्र की सुंदर कथा का आज की नई पीढी को माहेश्वरी होने के गौरवमयी इतिहास से जरूर अवगत कराए।


