प्रदेश में वर्तमान में 3 लाख 9 हजार मैट्रिक टन यूरिया, 68 हजार मैट्रिक टन डीएपी, 80 हजार मैट्रिक टन एनपीके एवं 1 लाख 68 हजार मैट्रिक टन एसएसपी उर्वरकों का स्टॉक उपलब्ध।
जयपुर। राज्य सरकार और कृषि विभाग द्वारा उर्वरकों की दैनिक उपलब्धता पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। कम उपलब्धता और अधिक खपत वाले जिलों व ब्लॉकों को चिन्हित कर प्रदेश भर में प्राथमिकता के साथ पूर्ण पारदर्शिता से उर्वरकों का वितरण किया जा रहा है। उर्वरकों की कालाबाजारी व जमाखोरी रोकने के लिए कृषि विभाग के अधिकारी प्रदेश भर में पूर्ण सतर्कता से कार्य कर रहे हैं।
कृषि मंत्री डॉ. किरोडी लाल ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा निरंतर केंद्र सरकार से समन्वय स्थापित कर प्रदेश की मांग अनुसार उर्वरकों की आपूर्ती करवाई जा रही है।
राज्य के किसानों को पर्याप्त मात्रा में उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु खरीफ 2026 में अप्रेल से अगस्त तक भारत सरकार द्वारा आवंटित 9 लाख 28 हजार मैट्रिक टन यूरिया के विरुद्ध 01 अप्रेल 2026 को उपलब्ध स्टॉक सहित वैश्विक संकट होने के बावजूद भी अब तक 12 लाख 29 हजार मैट्रिक टन (132 प्रतिशत) की उपलब्धता की गई है एवं अगस्त 2026 की शेष अवधि में 1 लाख 33 हजार मैट्रिक टन यूरिया की ओर आपूर्ति करवायी जायेगी।
इसी प्रकार खरीफ 2026 में अप्रेल से अगस्त तक भारत सरकार द्वारा 3 लाख 80 हजार मैट्रिक टन डीएपी की मांग के विरुद्ध 01 अप्रेल 2026 को उपलब्ध स्टॉक सहित अब तक 2 लाख 92 हजार मैट्रिक टन की उपलब्धता की गई है। देश में आयातित डीएपी की आपूर्ति मध्य एशिया युद्ध होने के कारण बाधित रही है। हालांकि अगस्त 2026 की शेष अवधि में 1 लाख मैट्रिक टन डीएपी की ओर आपूर्ति सुनिश्चित करवायी जायेगी। डीएपी की कम आपूर्ति होने से डीएपी के वैकल्पिक उर्वरक 1 लाख 49 हजार मैट्रिक टन एनपीके एवं 3 लाख 50 हजार मैट्रिक टन एसएसपी की उपलब्धता करवायी गई। इस प्रकार कृषकों को मांग अनुसार फास्फेटिक उर्वरक कुल 7 लाख 91 हजार मैट्रिक टन उपलब्ध करवाये गये है।
डॉ. किरोडी लाल ने बताया कि राज्य में कृषकों को अनुदानित उर्वरकों की उपलब्धता एवं पारदर्शी वितरण के लिये उर्वरक विक्रय की नवीन ऑनलाईन डिजिटल प्रणाली राज्य के सिरोही एवं राजसमंद जिलों में पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में चालू की गयी है, जिसमें अब तक 68 हजार कृषकों ने 10 हजार मैट्रिक टन उर्वरक क्रय किये है। नयी प्रक्रिया में कृषक बिना लाईन में लगे खेत से ऑनलाईन बुकिंग कर क्यू.आर.कोड से बोई गई फसल की वैज्ञानिक सिफारिश अनुसार उर्वरक क्रय करने की सुविधा दी गयी है। नयी प्रणाली से डीलर की मनमानी, कालाबाजारी, टैगिंग व डायर्वजन पर प्रभावी रोक लगेगी। यह नवीन प्रणाली शीघ्र ही राज्य के अन्य जिलों में भी प्रारम्भ की जायेगी।
राज्य में दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन की सामान्य तिथि 25 जून है। वर्ष 2026 में मानसून दिनांक 2 जुलाई 2026 को सक्रिय हुआ तथा 9 जुलाई 2026 तक सम्पूर्ण राज्य को कवर कर लिया गया।
डॉ. किरोडी लाल ने बताया कि गत खरीफ 2025 मे 158 लाख हैक्टेयर क्षेत्र में बुआई हुई थी। राज्य में खरीफ 2026 के लिए निर्धारित 165.39 लाख हेक्टेयर के लक्ष्य के विरुद्ध अब तक 147.75 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई की जा चुकी है, जो कि 89 प्रतिशत है तथा क्षेत्र में बुवाई का कार्य जारी है।
दिनांक 7 अगस्त 2026 तक प्रमुख खरीफ फसलों में बाजराः 39.82 लाख हेक्टेयर, मक्काः 9.73 लाख हेक्टेयर, ज्वारः 6.45 लाख हेक्टेयर, मूंगः 22.93 लाख हेक्टेयर, मोठः 8.82 लाख हेक्टेयर, मूंगफलीः 11.10 लाख हेक्टेयर, सोयाबीनः 9.30 लाख हेक्टेयर व ग्वारः 19.64 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हो गयी है। इस प्रकार फसलवार लक्ष्य की तुलना में वर्तमान में अनाज फसलों की 100 प्रतिशत, दलहनी फसलों की 87 प्रतिशत तथा तिलहनी फसलों की 84 प्रतिशत बुवाई पूर्ण हो चुकी है।
राज्य में सामान्य वर्षा 250.55 मि.मी. के विरुद्ध दिनांक 1 जून से 7 अगस्त 2026 की अवधि में 222.44 मि.मी. वास्तविक वर्षा दर्ज की गई है, जो सामान्य से 11.22 प्रतिशत कम है।
कृषि मंत्री ने बताया कि प्रदेश में वर्तमान में 3 लाख 9 हजार मैट्रिक टन यूरिया, 68 हजार मैट्रिक टन डीएपी, 80 हजार मैट्रिक टन एनपीके एवं 1 लाख 68 हजार मैट्रिक टन एसएसपी उर्वरकों का स्टॉक उपलब्ध है एवं निरन्तर आपूर्ति जारी है।
केंद्र सरकार की ओर से यूरिया, डीएपी एव अन्य उर्वरकों का राज्यों को माहवार व कम्पनीवार आवंटन किया जाता है। राज्य सरकार द्वारा प्राप्त आवंटन एवं जिलों की मांग के अनुसार जिलेवार आपूर्ति योजना तैयार कर प्रदेश में उर्वरकों का वितरण पारदर्शिता से कराया जा रहा है।
प्रमुख शासन सचिव कृषि एवं उद्यानिकी श्रीमती मंजू राजपाल ने बताया कि कृषकों को मृदा स्वास्थ्य कार्ड में अंकित सिफारिशानुसार ही उर्वरकों के उपयोग हेतु प्रेरित करने, उर्वरकों का समान रूप से पारदर्शिता के साथ वितरण कराने और उर्वरक वितरण में अनियमित्ता बरतने वाले विक्रेताओं, जमाखोरों और कालाबाजारी करने वालों के विरुद्ध कठोर कार्यवाही हेतु समस्त जिलाधिकारियों को निर्देशित किया गया है। जुलाई 2026 तक 8706 निरीक्षण 15 FIR, 02 गिरफ्तारी 55 लाइसेंस निरस्त/निलंबित एवं 25 मैट्रिक टन उर्वरक जब्त किया गया है ।
वैश्विक संकट के बावजूद उर्वरकों की प्रभावी आपूर्ति- डॉ. किरोडी लाल


