झारखंड और मणिपुर के बाद अब कश्मीर की घाटी में एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स की दिलेर धमक
जयपुर। नशे के सौदागरों के खिलाफ राजस्थान पुलिस की कार्रवाई अब प्रदेश की सीमाओं से निकलकर देश के दूर-दराज इलाकों तक पहुंच रही है। राजस्थान पुलिस की एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) ने चरस तस्करी के एक बड़े सूत्रधार को कश्मीर की वादियों से दबोचा है। ‘ऑपरेशन विषधरासीम’ के तहत एएनटीएफ ने अनंतनाग में कार्रवाई करते हुए 17 साल से फरार चल रहे 25 हजार रुपये के इनामी तस्कर शबीर अहमद खान उर्फ हाजी पुत्र शाबान खान निवासी अनंतनाग जम्मू-कश्मीर को गिरफ्तार किया है।
महानिरीक्षक पुलिस एएनटीएफ विकास कुमार ने बताया कि यह कार्रवाई महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा एवं अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस दिनेश एमएन के मार्गदर्शन एवं निर्देशन में की गई। आरोपी के संबंध में पुलिस अधीक्षक जीआरपी जोधपुर द्वारा 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया था। लंबे समय से फरार आरोपी अनंतनाग, जम्मू-कश्मीर में रहकर पुलिस की पकड़ से बच रहा था।
2009 में ट्रेन से पकड़ी चरस की खेप ने खोली थी कश्मीर से गुजरात तक फैले नेटवर्क की परतें
वर्ष 2009 में दिल्ली से अहमदाबाद जा रही एक ट्रेन में चरस की बड़ी खेप पकड़े जाने के बाद राजस्थान पुलिस को कश्मीर से गुजरात तक फैले नशे के नेटवर्क की जानकारी मिली थी। इस नेटवर्क का एक प्रमुख सूत्रधार अनंतनाग में बैठा हाजी उर्फ शबीर अहमद था।
पुलिस कार्रवाई की भनक लगने के बाद आरोपी फरार हो गया और अनंतनाग तथा आसपास के इलाकों में लगातार अपने ठिकाने बदलता रहा। कभी ससुराल तो कभी रिश्तेदारों के यहां रहकर उसने करीब 17 साल तक राजस्थान पुलिस की गिरफ्त से खुद को दूर रखा।
पिता से सीखा चरस का कारोबार, एमआर की नौकरी से बनाए ग्राहक
शबीर अहमद के पिता सिविल कॉन्ट्रेक्टर का काम करते थे और इसके साथ चरस के अवैध कारोबार से भी जुड़े थे। पिता के संपर्क में रहते हुए शबीर कम उम्र में ही इस अवैध धंधे से जुड़ गया।
शुरुआती दौर में शबीर ने मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव (एमआर) के रूप में काम किया। दवाइयों की सप्लाई के दौरान आसपास के मेडिकल स्टोर संचालकों और अन्य लोगों से उसकी पहचान बढ़ी। इसी दौरान वह चरस के ग्राहकों के संपर्क में आया और धीरे-धीरे चरस की व्यवस्था कर उसे ग्राहकों तक पहुंचाने लगा।
इलेक्ट्रीशियन ठेकेदार का ए-क्लास कार्ड बनवाकर राजस्थान तक फैलाया नेटवर्क
चरस के कारोबार से मोटी कमाई होते देख आरोपी ने अपना नेटवर्क कश्मीर से बाहर दूसरे राज्यों तक फैलाने की योजना बनाई। इसके लिए उसने इलेक्ट्रीशियन ठेकेदार का ए-क्लास कार्ड बनवाया और बाहरी कंपनियों के ठेके लेने शुरू किए।
इसी क्रम में उसने राजस्थान में भी एक कंपनी का कॉन्ट्रैक्ट लिया। ठेके के काम के दौरान दूसरे राज्यों के लोगों से उसकी जान-पहचान बढ़ी और उसने इन संपर्कों का इस्तेमाल तस्करी का नेटवर्क खड़ा करने में किया। इसके बाद वह राजस्थान सहित अन्य राज्यों के तस्करों के संपर्क में आया और बड़ी मात्रा में चरस की सप्लाई करने लगा।
धारा 370 हटने के बाद बदला तस्करी का तरीका
पूछताछ में आरोपी ने पुलिस को बताया कि जम्मू-कश्मीर में धारा 370 हटने के बाद चरस की खेती और स्थानीय कारोबार पर पुलिस की सख्ती बढ़ी, जिससे उसका स्थानीय स्तर का कारोबार प्रभावित हुआ। इसके बाद उसने स्थानीय स्तर की गतिविधियों के बजाय बाहरी राज्यों में बड़ी खेप में चरस पहुंचाने पर ज्यादा ध्यान देना शुरू किया।
17 साल बाद फिर सामने आया हाजी का नाम
एएनटीएफ द्वारा लंबे समय से फरार इनामी अपराधियों के संबंध में लगातार आसूचना संकलित की जा रही थी। इसी दौरान चरस तस्करी के पुराने नेटवर्क से जुड़े हाजी उर्फ शबीर अहमद के कश्मीर में सक्रिय होने की जानकारी सामने आई।
एएनटीएफ ने जीआरपी आबूरोड पुलिस से संपर्क कर आरोपी के संबंध में महत्वपूर्ण जानकारी जुटाई। स्थानीय स्तर पर पता चला कि आरोपी करीब 17 वर्षों से फरारी काट रहा है और पुलिस से बचने के लिए लगातार ठिकाने बदलता रहा है।
ANTF का “ऑपरेशन विषधरासीम”: कश्मीर के अनंतनाग से 17 साल से फरार 25 हजार का इनामी तस्कर हाजी दबोचा


