बांग्लादेश के दाउदकांडी मॉडल से सामुदायिक भागीदारी और सतत जलीय कृषि विकास को मिलेगी नई दिशा
कुमिल्ला (बांग्लादेश)। दक्षिण एशिया में जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने, ग्रामीण आजीविका को सशक्त बनाने तथा सतत मत्स्यपालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित तीन दिवसीय सार्क क्षेत्रीय कार्यशाला का समापन 31 अक्टूबर को बांग्लादेश के कुमिल्ला जिले में दाउदकांडी-कुमिल्ला बाढ़ग्रस्त मैदानी क्षेत्र मॉडल के क्षेत्रीय भ्रमण के साथ हुआ।
सार्क कृषि केंद्र (SAC) ने बांग्लादेश के संगठन शिक्षा स्वास्थ्य उन्नयन कार्यक्रम (SHISUK) के सहयोग से इस कार्यशाला का आयोजन किया। इसमें सार्क सदस्य देशों के विशेषज्ञों और विभिन्न हितधारकों ने भाग लिया तथा जलवायु-अनुकूल जलीय कृषि के विकास, सामुदायिक प्रबंधन और क्षेत्रीय सहयोग से जुड़े अनुभव साझा किए।
क्षेत्रीय भ्रमण के दौरान प्रतिभागियों ने दाउदकांडी मॉडल का अवलोकन किया, जो सामुदायिक भागीदारी और सामूहिक प्रबंधन पर आधारित बाढ़ग्रस्त मैदानी क्षेत्रों में मत्स्यपालन की एक महत्वपूर्ण पहल है। इस मॉडल के माध्यम से बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों के जल संसाधनों का सामूहिक एवं टिकाऊ उपयोग करने तथा स्थानीय समुदायों की आजीविका को मजबूत बनाने के प्रयासों को समझने का अवसर मिला।
विशेषज्ञों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के कारण दक्षिण एशिया में बाढ़, अनियमित वर्षा और जल संसाधनों के प्रबंधन से जुड़ी चुनौतियां बढ़ रही हैं। ऐसे में स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी, सामूहिक निर्णय प्रक्रिया और प्राकृतिक संसाधनों का सतत उपयोग ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
कार्यशाला का प्रमुख उद्देश्य सार्क सदस्य देशों के बीच ज्ञान, अनुभव और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों का आदान-प्रदान करना तथा मत्स्यपालन क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए समुदाय-आधारित रणनीतियों को प्रोत्साहित करना था।
दाउदकांडी मॉडल ने यह रेखांकित किया कि स्थानीय समुदायों को विकास प्रक्रिया में भागीदार बनाकर बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों के संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकता है। इससे ग्रामीण आजीविका को समर्थन देने और जलवायु परिवर्तन के प्रति समुदायों की अनुकूलन क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
दक्षिण एशिया में खाद्य एवं पोषण सुरक्षा, ग्रामीण रोजगार और सतत कृषि विकास की दृष्टि से इस प्रकार की क्षेत्रीय पहलें महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। सार्क कृषि केंद्र की यह कार्यशाला सदस्य देशों के बीच सहयोग को मजबूत करने तथा जलवायु-अनुकूल जलीय कृषि के लिए व्यावहारिक समाधानों को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास रही।
दक्षिण एशिया में जलवायु-अनुकूल मत्स्यपालन को बढ़ावा देने के लिए सार्क की क्षेत्रीय कार्यशाला संपन्न


