फतेहपुर। शेखावाटी की धरती ने कला और संस्कृति के क्षेत्र में एक बार फिर देशभर में अपनी पहचान कायम की है। फतेहपुर निवासी फिल्मकार, लेखक, निर्माता एवं निर्देशक राधेश्याम पीपलवा को 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह में उनकी कोंकणी भाषा की फिल्म ‘मोगा आसुम’ (2024) के लिए सर्वश्रेष्ठ कोंकणी फिल्म का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला है। यह उपलब्धि पूरे फतेहपुर क्षेत्र के लिए गौरव का विषय है।
राधेश्याम पीपलवा ने फिल्म निर्माण और निर्देशन के क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय रहते हुए राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है। अब तक पांच राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार प्राप्त करने वाले राजस्थान के फिल्मकारों में उनका नाम शामिल है। उनकी उपलब्धि से क्षेत्र के युवाओं को कला और सिनेमा के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी।
प्रेम और मानवीय संवेदनाओं की कहानी है ‘मोगा आसुम’
फिल्म ‘मोगा आसुम’ का अर्थ ‘प्यार बना रहे’ है। यह फिल्म प्रेम, रिश्तों और मानवीय संवेदनाओं को केंद्र में रखती है। कहानी एक ऐसे दंपती के इर्द-गिर्द घूमती है, जिनके जीवन में पत्नी की मृत्यु के बाद मानवीय परिस्थितियां बदल जाती हैं। फिल्म परिवार, समुदाय और जीवन की वास्तविकताओं को संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत करती है।
फिल्म में घर-परिवार से जुड़े लोगों, उनके भावनात्मक रिश्तों और जीवन के उतार-चढ़ाव को प्रभावशाली तरीके से दिखाया गया है। इसकी कहानी दर्शकों को मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक संबंधों की गहराई से जोड़ती है।
राजस्थान की कला-संस्कृति को मिला नया मंच
राधेश्याम पीपलवा राजस्थानी और हिंदी भाषा में भी फिल्मों का निर्माण एवं निर्देशन कर चुके हैं। उनकी फिल्मों में राजस्थान और देश की कला, संस्कृति, संगीत तथा खेल परंपराओं को प्रमुखता दी गई है। फिल्म निर्माण के माध्यम से वे देश की समृद्ध विरासत और विभिन्न सांस्कृतिक पहचानों को दर्शकों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।
उनकी इस उपलब्धि से फतेहपुर और शेखावाटी क्षेत्र का गौरव बढ़ा है। राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिलने से स्थानीय प्रतिभाओं को भी अपनी रचनात्मक क्षमता प्रदर्शित करने का प्रोत्साहन मिलेगा।
राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित राधेश्याम पीपलवा की यह उपलब्धि राजस्थान के लिए गर्व का विषय है।
फतेहपुर के बेटे राधेश्याम पीपलवा को मिला राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार, कोंकणी फिल्म ‘मोगा आसुम’ को मिला सम्मान


