नई दिल्ली। रविवार को दांबुला में खेले गए त्रिकोणीय सीरीज़ के फ़ाइनल में, संभवतः एक अनकैप्ड खिलाड़ी के रूप में अपनी आख़िरी पारी खेलते हुए वैभव सूर्यवंशी ने मात्र 29 गेंदों में 94 रन की विस्फोटक पारी खेली। उन्होंने लिस्ट ए क्रिकेट का सबसे तेज़ अर्धशतक जड़ते हुए इंडिया A को श्रीलंका A पर 66 रन की शानदार जीत दिलाई।
सूर्यवंशी फ़ाइनल में आने से पहले चार पारियों में 117 रन बना चुके थे। हालांकि, उनके दौरे का सबसे चर्चित क्षण चार दिन पहले श्रीलंका A के खिलाड़ियों के साथ हुई तीखी नोकझोंक थी। फटकार और जुर्माने की चर्चाओं के बीच सूर्यवंशी ने इस बार अपने बल्ले से जवाब दिया।
उनकी तूफ़ानी बल्लेबाज़ी ने इंडिया A की पारी की नींव रखी। हालांकि बीच के ओवरों में रन गति धीमी पड़ गई, फिर भी टीम 377/9 तक पहुंचने में सफल रही। एक समय ऐसा लग रहा था कि इंडिया A 400 से अधिक का स्कोर बना लेगा।
अंतिम ओवरों में अनुकूल रॉय ने 15 गेंदों पर 39 रन की ताबड़तोड़ पारी खेली, जिसमें चार छक्के शामिल थे। समस्तीपुर के रहने वाले रॉय, जो सूर्यवंशी के ही शहर से आते हैं ने इंडिया A की पारी को मज़बूत अंत दिया। उस समय टीम 334/8 पर संघर्ष कर रही थी और 350 से पहले सिमटने का ख़तरा था।
रॉय ने गेंदबाज़ी में भी अहम योगदान दिया। उन्होंने बाएं हाथ की स्पिन से दो महत्वपूर्ण विकेट लिए, जिनमें सेट बल्लेबाज़ विजयकांत वियसकांत का विकेट भी शामिल था। इससे सातवें विकेट के लिए हुई 77 रन की साझेदारी टूटी और श्रीलंका A की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा।
हालांकि श्रीलंका A की ओर से वनुजा साहन ने 69 गेंदों पर 62 रन बनाकर संघर्ष किया, लेकिन उनका विकेट मैच का निर्णायक मोड़ साबित हुआ। श्रीलंका A की पूरी टीम 48वें ओवर में 311 रन पर ऑलआउट हो गई। इंडिया A के लिए विप्रज निगम और यश ठाकुर ने तीन-तीन विकेट लिए।
फिर भी इस मैच की सबसे यादगार पारी सूर्यवंशी की रही। उन्होंने केवल 11 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया। उनकी पहली सभी पांच गेंदें बाउंड्री के लिए गईं। वह लिस्ट ए क्रिकेट का सबसे तेज़ शतक बनाने की राह पर दिख रहे थे, लेकिन नौवें ओवर में श्रीलंका A के कप्तान और ऑफ़स्पिनर सहान अराछिगे ने उन्हें आउट कर दिया। उस समय इंडिया A ने केवल 8.5 ओवर में 132 रन बना लिए थे।
सूर्यवंशी ने अपनी पारी में 10 चौके और आठ छक्के लगाए। वह नौवां छक्का लगाने की कोशिश में मिड-ऑफ़ पर कैच आउट हुए। लगातार दूसरी बार उन्हें अराछिगे ने ही आउट किया। पिछले सुपर ओवर मुकाबले में भी सूर्यवंशी उनकी गेंद पर पॉइंट पर कैच दे बैठे थे।
उनकी बल्लेबाज़ी में एक्स्ट्रा कवर के ऊपर लगाए गए शानदार शॉट विशेष रूप से आकर्षक रहे। साथ ही उन्होंने शॉर्ट गेंदों पर अंदर जाकर पुल और फ़्लिक शॉट खेलकर गेंदबाज़ों पर लगातार दबाव बनाए रखा। उनकी सबसे प्रभावशाली स्ट्रोकों में से एक विकेटकीपर के ऊपर से खेला गया रैम्प शॉट था, जिसे उन्होंने कुगादास मतुलन की तेज़ गेंद पर अंजाम दिया।
एक गेंद पहले ही उन्होंने वाइड यॉर्कर को बैकवर्ड पॉइंट के ऊपर से छक्के के लिए भेजकर दर्शकों को रोमांचित कर दिया था। सूर्यवंशी के क्रीज़ पर रहते हुए इंडिया A ने अपने कुल स्कोर का लगभग 35 प्रतिशत रन बना लिया था। उनके आउट होने के बाद बाक़ी बल्लेबाज़ों ने 41.1 ओवर में केवल 245 रन जोड़े।
मध्य ओवरों में तिलक वर्मा और ऋतुराज गायकवाड़ ने चौथे विकेट के लिए 84 रन की साझेदारी कर पारी को संभाला। तिलक ने 90 गेंदों में 67 रन बनाए, लेकिन उनकी धीमी पारी के कारण रन गति अपेक्षाकृत कम रही। उनके आउट होने के बाद इंडिया A ने जल्दी-जल्दी तीन विकेट गंवा दिए। इसके बाद रॉय और विप्रज (27 रन) की उपयोगी पारियों ने इंडिया A को चुनौतीपूर्ण स्कोर तक पहुंचाया।
377 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए श्रीलंका A को अपने शीर्षक्रम से बड़ी पारी की ज़रूरत थी, लेकिन यश ठाकुर ने उनके शीर्ष तीन बल्लेबाज़ों को पवेलियन भेज दिया। निरोशन डिकवेला बोल्ड हुए, अविष्का फ़र्नांडो स्लिप में कैच दे बैठे और नुवानिदु फ़र्नांडो डीप स्क्वायर लेग पर कैच आउट हुए।
इंडिया A के डेब्यू कर रहे तेज़ गेंदबाज़ अशोक शर्मा भी काफ़ी प्रभावशाली रहे। हालांकि शुरुआती स्पेल में उन्होंने कुछ रन दिए, लेकिन अपनी गति और मूवमेंट से बल्लेबाज़ों को लगातार परेशान किया। उन्होंने सदीरा समराविक्रमा को 52 रन पर आउट कर श्रीलंका A को बड़ा झटका दिया।
इसके बाद श्रीलंका A लगातार विकेट खोता रहा। वनुजा साहन ने अंत तक संघर्ष किया, लेकिन इंडिया A के स्पिनरों ने उनकी उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया और इंडिया A ने शानदार अंदाज़ में त्रिकोणीय सीरीज़ का ख़िताब अपने नाम कर लिया।
सूर्यवंशी के सबसे तेज़ लिस्ट ए पचासे ने इंडिया A को बनाया चैंपियन

