जयपुर। खरीफ 2026 के दौरान कृषकों को उनकी मांग के अनुरूप उर्वरकों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा उर्वरकों के संतुलित एवं वैज्ञानिक उपयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कृषि एवं उद्यानिकी विभाग मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल की अध्यक्षता में शुक्रवार को पंत कृषि भवन के सभा कक्ष में वीसी के माध्यम से सभी अतिरिक्त निदेशक कृषि (विस्तार) खंड और सभी संयुक्त निदेशक जिला परिषद के साथ बैठक का आयोजन किया गया।
बैठक में सभी जिला स्तरीय अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करते हुए उर्वरकों की प्रभावी निगरानी एवं समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
कृषि मंत्री ने कहा कि उर्वरकों के राज्य से बाहर अवैध परिगमन को रोकने के लिए सीमावर्ती जिलों में स्थापित चेकपोस्टों पर सघन निगरानी रखी जाएं। साथ ही उर्वरक निरीक्षकों द्वारा नियमित निरीक्षण कर जमाखोरी, टैगिंग, कालाबाजारी एवं अनियमितताओं पर उर्वरक नियंत्रण आदेश, 1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि नीम कोटेड यूरिया के औद्योगिक एवं गैर-कृषि उपयोग पर विशेष निगरानी रखते हुए औचक निरीक्षण कर पकड़े जाने वाली इकाइयों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
राज्य सरकार द्वारा उर्वरकों की आपूर्ति, गुणवत्ता नियंत्रण तथा विक्रय में पारदर्शिता बनाए रखने हेतु जिला स्तर पर गठित “फर्टिलाइजर रेगुलेटरी टास्क फोर्स” की बैठकें अप्रैल के प्रथम सप्ताह में आयोजित की जाएंगी। इसके साथ ही “धरती माता बचाओ अभियान” के अंतर्गत जिला, ब्लॉक एवं ग्राम पंचायत स्तर पर निगरानी समितियों की बैठकें भी 15 अप्रैल तक आयोजित कर किसानों को उर्वरकों के संतुलित उपयोग, जैविक एवं कार्बनिक खेती को अपनाने तथा कालाबाजारी, अवैध भंडारण एवं गैर-कृषि उपयोग की रोकथाम के संबंध में जागरूक किया जाएगा। उन्होंने आईएफएमएस के साथ एग्री स्टैक को जोड़ने के भी निर्देश दिए, जिससे उर्वरकों के डाइवर्जन और कालाबाजारी पर रोक लग सके।
कृषि मंत्री ने कहा कि प्रत्येक विक्रेता के यहां पीओएस मशीन के माध्यम से स्टॉक का सत्यापन, मूल्य सूची का प्रदर्शन एवं आवश्यक दस्तावेजों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। जिले में उर्वरकों के सुचारू वितरण के लिए कृषि पर्यवेक्षकों एवं सहायक कृषि अधिकारियों की विक्रेतावार ड्यूटी निर्धारित की जाएगी, जिससे किसानों को समान रूप से उर्वरक उपलब्ध हो सके।
खरीफ 2026 हेतु उर्वरक प्रबंधन सुदृढ़: किसानों को समय पर उपलब्धता व संतुलित उपयोग पर विशेष जोर


