राजस्थान पुलिस की एडवाइजरी जारी, गूगल जेमिनी, चैटजीपीटी और ग्रोक जैसे AI टूल्स का दुरुपयोग कर साइबर अपराधी बना रहे लोगों को निशाना
जयपुर। राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम शाखा ने आमजन को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित साइबर धोखाधड़ी से सतर्क रहने की एडवाइजरी जारी की है। साइबर अपराधी अब Google Gemini AI, ChatGPT, Grok और अन्य AI तकनीकों का इस्तेमाल कर आधार बायोमेट्रिक सुरक्षा प्रणालियों को बायपास करने की कोशिश कर रहे हैं। डीपफेक वीडियो, फेस ऑथेंटिकेशन और मोबाइल नंबर अपडेट जैसी तकनीकों के जरिए अपराधी लोगों की पहचान का दुरुपयोग कर आर्थिक एवं डिजिटल ठगी को अंजाम दे सकते हैं।
अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम वीके सिंह ने बताया कि अपराधी सबसे पहले डेटा लीक, फिशिंग और सोशल इंजीनियरिंग के जरिए पीड़ित का आधार नंबर, फोटो और मोबाइल जानकारी जुटाते हैं। इसके बाद कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) या अपडेट क्लाइंट लाइट (UCL) किट के दुरुपयोग से आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर बदलने का प्रयास किया जाता है। मोबाइल नंबर बदलते ही ओटीपी अपराधियों के पास पहुंचने लगते हैं, जिससे वे पीड़ित के डिजिटल अकाउंट्स पर नियंत्रण हासिल कर लेते हैं।
एडीजी सिंह ने बताया कि साइबर अपराधी AI आधारित डीपफेक तकनीक का उपयोग कर ऐसा नकली वीडियो तैयार कर सकते हैं जिसमें व्यक्ति की आंखों की हरकतें और चेहरे के भाव वास्तविक प्रतीत होते हैं। आधुनिक फेस ऑथेंटिकेशन सिस्टम भी कई बार इसे असली व्यक्ति मान लेते हैं। इसके बाद अपराधी डिजिलॉकर, ई-केवाईसी और बैंकिंग सेवाओं का दुरुपयोग कर फर्जी खाते खोल सकते हैं और अवैध लेनदेन कर सकते हैं।
सुरक्षित रहने के लिए पुलिस की सलाह
राजस्थान पुलिस ने आमजन से अपने आधार बायोमेट्रिक्स को mAadhaar ऐप या UIDAI की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर लॉक करने की अपील की है। बायोमेट्रिक्स लॉक होने पर फिंगरप्रिंट और आइरिस डेटा का उपयोग तब तक नहीं किया जा सकेगा जब तक स्वयं उपयोगकर्ता उसे अनलॉक न करे। इसके अलावा नागरिकों को नियमित रूप से UIDAI पोर्टल पर जाकर आधार ऑथेंटिकेशन हिस्ट्री चेक करने की सलाह दी गई है, ताकि यह पता चल सके कि पिछले छह महीनों में आधार का उपयोग कहां और किस उद्देश्य से हुआ है।
सिंह ने बताया कि यदि किसी व्यक्ति को आधार से जुड़े मोबाइल नंबर अपडेट या बदलाव का कोई अनचाहा एसएमएस प्राप्त होता है, तो उसे नजरअंदाज न करें। आधार के साथ सक्रिय ईमेल आईडी लिंक रखना भी जरूरी है ताकि किसी भी बदलाव की तत्काल जानकारी नोटिफिकेशन के द्वारा आपको मिल सके।
राजस्थान पुलिस ने आमजन से अपील की है कि यदि इस प्रकार की साइबर ठगी होती है या प्रयास किया जाता है, तो तुरंत निकटतम पुलिस थाना, साइबर पुलिस स्टेशन, राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल https://cybercrime.gov.in, साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 या साइबर हेल्पलाइन नंबर 9256001930/9257510100 पर शिकायत दर्ज करवाएं।
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