जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अध्यक्षता में मुख्यमंत्री कार्यालय में मंत्रिमंडल एवं मंत्रिपरिषद की बैठक आयोजित हुई। इसमें पंचायत राज चुनाव एवं स्थानीय निकाय चुनाव वन स्टेट-वन इलेक्शन की अवधारणा पर कराए जाने, किसानों की आय बढ़ा कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए राजस्थान कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण नीति-2026 व राजस्थान फूड पार्क विकास नीति-2026 का अनुमोदन, ट्री आउटसाइड फॉरेस्ट पॉलिसी लाने, पर्यावरण संरक्षण एवं श्रम सुधारों से सम्बन्धित कई महत्वपूर्ण फैसले किए गए।
पंचायत राज एवं नगरीय निकाय चुनाव, सीट आरक्षण के लिए शुरू होगी लॉटरी प्रक्रिया
प्रेसवार्ता में उपमुख्यमंत्री डॉ. प्रेम चन्द बैरवा, उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ और संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल ने मंत्रिमंडल के निर्णयों की जानकारी दी। संसदीय कार्य मंत्री ने बताया कि प्रदेश में आगामी पंचायत राज चुनाव एवं स्थानीय निकाय चुनाव वन स्टेट-वन इलेक्शन की अवधारणा पर कराए जाने का विनिश्चय किया गया। उन्होंने बताया कि पंचायत राज एवं स्थानीय निकाय चुनाव अलग-अलग समय पर होने के कारण विकास कार्यों की गति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। विकास की गति को सुचारू बनाए रखने तथा धन, श्रम एवं समय की बचत की सोच के साथ प्रदेश के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने नगरीय निकाय तथा पंचायतीराज संस्थाओं के चुनाव वन स्टेट-वन इलेक्शन की अवधारणा पर करवाने के सम्बन्ध में वर्ष 2024-25 के बजट में घोषणा की थी।
उन्होंने बताया कि राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग (राजनैतिक प्रतिनिधित्व) आयोग की अनुशंसाएं 5 अगस्त 2026 को राज्य सरकार को प्राप्त हो गई हैं। मंत्रिमंडल की बैठक में इन सिफारिशों को स्वीकार किए जाने के साथ ही नगरीय निकाय एवं पंचायत राज अधिनियम में एससी, एसटी वर्ग के साथ-साथ ओबीसी आरक्षण का प्रावधान किए जाने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। अनुमोदन के उपरांत अब इन वर्गों की सीटों के आरक्षण के लिए लॉटरी प्रक्रिया प्रारम्भ की जाएगी।
राजस्थान कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण नीति, 2026 का अनुमोदन
उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने बताया कि कृषि एवं बागवानी क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से राजस्थान कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण नीति, 2026 का अनुमोदन किया गया है। इस नीति का उद्देश्य राज्य में कृषि और खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों को प्रोत्साहित करना, ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता को बढ़ावा देना, उपज के मूल्य संवर्धन द्वारा किसानों की आय में वृद्धि, सप्लाई चेन को सुदृढ़ करना तथा प्रोसेस्ड एग्रो उत्पादों के विपणन की प्रभावी व्यवस्था सुनिश्चित करना है। इसमें कृषि प्रसंस्करण उद्योगों फल-सब्जी, मसाला, अनाज, तिलहन, दलहन, औषधीय उत्पाद, लघु वन उपज, शहद, दुग्ध व पशु आहार इकाइयों तथा साइलोज व कोल्ड स्टोरेज जैसी आधारभूत ढांचा विकास परियोजनाओं को शामिल किया गया है।
उन्होंने बताया कि श्रीअन्न (मिलेट्स) को बढ़ावा देने के लिए श्रीअन्न प्रमोशन एजेंसी की स्थापना भी की जाएगी। कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों, श्रीअन्न इकाइयों तथा प्राथमिक प्रसंस्करण इकाइयों के लिए 50 लाख रुपये तक के ऋण पर 60 प्रतिशत, 50 से 100 लाख रुपये तक के ऋण पर 50 प्रतिशत तथा एक करोड़ रुपये से अधिक के ऋण पर 40 प्रतिशत की दर से (अधिकतम 1 करोड़ 50 लाख रुपये तक) का पूंजीगत अनुदान देय होगा। एफपीओ, टीएसपी क्षेत्रों, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं महिला उद्यमियों की भागीदारी बढ़ाने के लिए अतिरिक्त 5 प्रतिशत पूंजीगत अनुदान का विशेष प्रावधान रखा गया है। कोल्ड स्टोरेज, साइलोज एवं निर्यात हेतु अनुदान राजस्थान निवेश प्रोत्साहन नीति, 2024 के प्रावधानों के अनुसार देय होगा तथा कृषि व खाद्य प्रसंस्करण परियोजनाएं रिप्स 2024 के एमएसएमई मानक पैकेज के अंतर्गत भी पूंजीगत अनुदान के लिए आवेदन कर सकेंगी।
श्रम कल्याण की बड़ी पहल, काम के घण्टे हुए तय, साल में 2 बार बढ़ेगा महंगाई भत्ता


