- पुलिस मुख्यालय में ‘एसएलएससीआर’ की उच्चस्तरीय बैठक
- ट्रैक से स्टेशन तक सुरक्षा और आधारभूत संरचनाएं बढ़ाने पर मंथन
- स्टेशन पर वेंडर्स शत-प्रतिशत सत्यापन आवश्यक
जयपुर। राजस्थान में बढ़ते रेल यातायात और आधुनिक होते रेलवे स्टेशनों के साथ सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए जीआरपी, आरपीएफ, आईबी, डीएफसीसी और स्थानीय पुलिस अब और अधिक एकजुट होकर कार्य करेंगी। रेलवे सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल, संयुक्त प्रशिक्षण और आधुनिक तकनीक का व्यापक स्तर पर इस्तेमाल होगा।
पुलिस मुख्यालय में सोमवार को स्टेट लेवल सिक्योरिटी कमेटी फॉर रेलवेज (एसएलएससीआर) की उच्च स्तरीय बैठक हुई। इसमें प्रदेश में रेलवे सुरक्षा से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक की अध्यक्षता करते हुए पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) संजय कुमार अग्रवाल ने कहा कि भारतीय रेलवे देश की परिवहन व्यवस्था और अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी है।
उन्होंने कहा कि रेलवे की सुरक्षा केवल यात्रियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका देश की समग्र सुरक्षा व्यवस्था से भी सीधा और अहम संबंध है। उन्होंने कहा कि राजस्थान में बड़ी संख्या में ट्रेनों का संचालन और गुजरना होता है। रोजाना लाखों व्यक्ति यात्रा करते हैं। ऐसे में रेलवे परिसरों और ट्रेनों में सुरक्षा व्यवस्था को लगातार मजबूत करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा के निर्देशन में राजस्थान पुलिस पूरी मुस्तैदी से रेलवे सुरक्षा के लिए हरसंभव प्रयास कर रही है।
— रेलवे कॉरिडोर में रोकी जाएगी मादक पदार्थों की तस्करी
अग्रवाल ने कहा कि जीआरपी, आरपीएफ और सभी एजेंसियों के बीच संयुक्त प्रशिक्षण एवं सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान होना चाहिए। ड्रग्स तस्करी, जहरखुरानी, साइबर अपराध, चाइल्ड ट्रैफिकिंग, एससी-एसटी से जुड़े अपराध, भीड़ प्रबंधन, पथराव, ट्रेनों को डिरेल करने के षड़यंत्र, 139 पर दर्ज यात्रियों के सामान चोरी होने के मामले सहित विभिन्न प्रकरणों में संयुक्त कार्रवाई की रणनीति बनाकर आगे बढ़ना होगा। इसके साथ ही प्रदेश के रेलवे कॉरिडोर में नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए भी समन्वित कार्रवाई की जाए।
— अमृत भारत स्टेशनों के साथ सुरक्षा ढांचे पर भी फोकस
बैठक में अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस रेलवेज राजस्थान सुष्मित विश्वास ने कहा कि अमृत भारत योजना के तहत रेलवे स्टेशनों के पुनर्विकास के साथ सुरक्षा व्यवस्था को भी आधुनिक बनाया जा रहा है। उन्होंने एक प्रस्तुतीकरण के जरिए स्टेशन सिक्योरिटी, रेलवे ट्रैक सुरक्षा, आउटपोस्ट सुरक्षा, जीआरपी के लिए स्थान एवं संसाधन, मानव संसाधन, यूनिट अपग्रेडेशन और ट्रेनों की जांच से जुड़े प्रस्तावों पर विचार रखे।
विश्वास ने बताया कि पिछले दो वर्षों में प्रदेश के रेलवे क्षेत्र में बीएनएस के तहत अपराधों में 25 प्रतिशत और चोरी के मामलों में 35 प्रतिशत की कमी आई है। वहीं, स्पेशल और लोकल एक्ट के तहत की जाने वाली कार्रवाइयों में वृद्धि हुई है। यह सफलता सभी सुरक्षा एजेंसियों के आपसी समन्वय और प्रो-एक्टिव पुलिसिंग का परिणाम है।
बैठक में रेलवे स्टेशनों पर वेंडर्स का शत-प्रतिशत सत्यापन कराने पर जोर दिया गया। साथ ही, स्टेशन और ट्रेनों में निगरानी बढ़ाने के लिए सीसीटीवी कैमरों का कवरेज बढ़ाने तथा पार्सल एवं बैग स्कैनर जैसी तकनीक का अधिक इस्तेमाल करने पर भी चर्चा हुई। कई स्टेशनों पर अनधिकृत प्रवेश-निकास के खुले स्थानों को चिन्हित कर बंद करने और अंतरिम सुरक्षा व्यवस्था करने की जरूरत बताई गई।
— सुरक्षा से जुड़ी सभी एजेंसियों के बीच समन्वय हो
अधिकारियों ने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सभी एजेंसियों के बीच नियमित समन्वय, सूचना साझा करने और संयुक्त कार्रवाई को प्राथमिकता देने पर जोर दिया। बैठक में गृह मंत्रालय एवं रेलवे बोर्ड के निर्देशानुसार एजेंडे, संवेदनशील रेलवे, सेक्शन एवं परिसम्पत्तियों का चिन्हीकरण, रक्षा एवं सीमावर्ती क्षेत्रों के रेल मार्गों को प्राथमिकता, संयुक्त सुरक्षा समीक्षा का आयोजन पर विस्तृत चर्चा की गई।
समन्वय से ही अधिक सुदृढ़ होगी रेलवे सुरक्षा – पुलिस महानिदेशक (कानून व्यवस्था)


