नई दिल्ली। भारतीय महिला टीम ने एशिया कप 2026 के फ़ाइनल में श्रीलंका को 72 रनों के बड़े अंतर से हराकर आठवीं बार ट्रॉफ़ी अपने नाम कर ली। भारत की इस ख़िताबी जीत में स्मृति मांधना और शेफ़ाली वर्मा ने धाकड़ अर्धशतकीय पारियां खेलीं। दोनों बल्लेबाज़ों के बेहतरीन प्रदर्शन की बदौलत भारत 183 रनों का विशाल स्कोर खड़ा करने में सफल रहा। इसके बाद दीप्ति शर्मा और एन श्री चरणी ने कमाल की गेंदबाज़ी की और श्रीलंका को सिर्फ़ 111 रनों पर समेट दिया।
एशिया कप के पिछले मैचों में यह साफ़ दिखा था कि पहले 10-15 ओवरों के बाद पिच काफ़ी धीमी हो जाती थी और स्पिनरों की मददगार बन जाती थी। शायद इसी कारण फ़ाइनल में भारतीय कप्तान हरमनप्रीत कौर ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाज़ी करने का फ़ैसला किया।
शेफ़ाली और मांधना ने कप्तान के इस फ़ैसले को सही साबित करते हुए 129 रनों की सलामी साझेदारी की। महिला T20 एशिया कप के इतिहास में किसी भी विकेट के लिए यह सबसे बड़ी साझेदारी थी। इस दौरान शेफ़ाली ने 24 गेंदों में अर्धशतक जड़ा, जो टूर्नामेंट के इतिहास का सबसे तेज़ अर्धशतक था। शेफ़ाली ने 39 गेंदों में 68 रनों की पारी खेली, जबकि मांधना ने 39 गेंदों में 59 रन बनाए।
पारी की शुरुआत से ही दोनों बल्लेबाज़ों ने यह साफ़ कर दिया था कि वे तेज़ी से रन बनाने का प्रयास करेंगी। मांधना ने पारी की पहली ही गेंद पर चौका लगाते हुए आक्रमण का आगाज़ किया और उसके बाद यह सिलसिला आगे बढ़ता गया। दोनों बल्लेबाज़ों ने पावरप्ले में 57 रन जोड़े और 10 ओवर पूरे होने तक टीम के स्कोर को 98 तक पहुंचा दिया।
हालांकि 129 के स्कोर पर शेफ़ाली का विकेट गिरने के बाद अगले ही ओवर में मांधना भी 59 रन के निजी स्कोर पर दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से रन आउट हो गईं। यह तीसरी बार था जब मांधना इस टूर्नामेंट में रन आउट हुईं।
इसके बाद भारतीय पारी थोड़ी धीमी पड़ गई। हरमनप्रीत और ऋचा ऋचा के बीच 21 गेंदों में 28 रनों की साझेदारी हुई। घोष का विकेट 18वें ओवर की पहली गेंद पर गिरा और उसके बाद 20वें ओवर की चौथी गेंद तक कोई बाउंड्री नहीं आई। हालांकि अंतिम दो गेंदों पर चौका और छक्का आया, जिसकी मदद से भारत 183 रनों के स्कोर तक पहुंच गया।
इस पहाड़ जैसे लक्ष्य का पीछा करते हुए श्रीलंका की टीम कभी भी अच्छे मोमेंटम में नहीं दिखी। क्रांति गौड़ ने अपने पहले ही ओवर में विकेट निकालकर श्रीलंका को और भी बैकफ़ुट पर धकेल दिया। इसके बाद चमरी अतापत्तू और विष्मी गुणारत्ने के बीच 58 रनों की साझेदारी हुई, लेकिन इसके लिए दोनों बल्लेबाज़ों ने 54 गेंदें खेलीं। इस साझेदारी के बाद दीप्ति और एन श्री चरणी ने लगातार विकेट निकाले।
श्री चरणी ने चार विकेट लेते हुए भारतीय टीम की सबसे सफल गेंदबाज़ रहीं। वहीं दीप्ति ने तीन विकेट लिए और 14 विकेट के साथ टूर्नामेंट की सबसे सफल गेंदबाज़ रहीं।
मांधना, शेफ़ाली की मदद से भारत ने 8वीं बार जीता एशिया कप


