एटीएम से कैश निकालते वक्त धरे गए आरोपी; 95 डेबिट कार्ड और 30 सिम बरामद, टेलीग्राम के जरिए फैला रखा था जाल
जयपुर। साइबर अपराधियों के खिलाफ पुलिस मुख्यालय और केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देशों पर जोधपुर कमिश्नरेट पुलिस ने एक बहुत बड़ी सफलता हासिल की है। साइबर थाना पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है जो देशभर के लोगों से ठगी गई करोड़ों की राशि को ठिकाने लगाने का काम कर रहा था। पुलिस ने इस कार्रवाई में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से भारी मात्रा में बैंकिंग उपकरण बरामद किए हैं।
पुलिस आयुक्त शरत कविराज और डीसीपी मुख्यालय शाहीन सी के निर्देशन में गठित विशेष टीम शहर के विभिन्न एटीएम पर संदिग्ध गतिविधियों की निगरानी कर रही थी। इसी दौरान निरीक्षक सुरेश सारण के नेतृत्व में टीम ने एटीएम से कैश निकालते तीन संदिग्धों भजन लाल विश्नोई (25) निवासी नांदड़ा कला थाना एयरपोर्ट, अक्षय राजपुरोहित (22) निवासी तिंवरी हाल मंडोर और धनराज विश्नोई (21) निवासी सरनाडा थाना डांगियावास जोधपुर को रोका। पुलिस को देखते ही आरोपियों ने भागने की कोशिश की, लेकिन टीम ने मुस्तैदी दिखाते हुए उन्हें दबोच लिया।
छापेमारी में मिला साइबर ठगी का जखीरा
जब पुलिस ने आरोपियों के पांचवीं रोड स्थित कमरे की तलाशी ली, तो वहां विभिन्न बैंकों के 95 डेबिट कार्ड, 30 सक्रिय सिम कार्ड, 18 बैंक पासबुक/डायरी, 11 स्मार्टफोन और अलग-अलग नामों से प्राप्त 9 डाक पार्सल लिफाफे मिले, जिन्हें जब्त किया गया।
ठगी का तरीका
पूछताछ में सामने आया कि यह गिरोह टेलीग्राम के जरिए देश के अलग-अलग राज्यों से बैंक खाते ‘किराये’ पर लेता था। खरीदे गए खातों की किट (एटीएम और पासबुक) फर्जी नामों से पार्सल के जरिए मंगवाई जाती थी।
ठगी की राशि खाते में आते ही ये लोग 30 से 60 मिनट के भीतर उसे एटीएम से निकाल लेते थे, ताकि साइबर सेल द्वारा खाता फ्रीज किए जाने से पहले पैसा हाथ में आ जाए। निकाले गए नकद को ऊंचे मुनाफे पर वर्चुअल करेंसी में बदलकर साइबर ठगों को ट्रांसफर कर दिया जाता था।
जोधपुर पुलिस ने इस बड़ी कार्रवाई के साथ जनता को सतर्क रहने की सलाह दी है। अपना बैंक खाता, सिम या दस्तावेज किसी भी लालच में आकर दूसरों को न दें। सोशल मीडिया पर इन्वेस्टमेंट या ट्रेडिंग के फर्जी प्रलोभनों से बचें। किसी फर्जी अधिकारी के नाम से आने वाले वीडियो कॉल से न डरें। साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं।
इस कार्रवाई में निरीक्षक सुरेश सारण के साथ एएसआई जमशेद खां, कानसिंह, राजेश कुमार, हैड कांस्टेबल राम दयाल, कांस्टेबल महिपाल और महेन्द्र की विशेष भूमिका रही।
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