नई दिल्ली। न्यूज़ीलैंड में पांच मैचों की T20I सीरीज़ की समाप्ति के बाद भारतीय टीम के मुख्य कोच गौतम गंभीर ने अपने खिलाड़ियों के आक्रामक और निर्भीक अंदाज़ की तारीफ़ की। अंतिम मुक़ाबले में हार के बावजूद भारत ने 3-2 से सीरीज़ को अपने नाम कर लिया।
श्रेयस अय्यर की अगुवाई वाली टीम क्राइस्टचर्च में खेले गए पहले T20I से 24 घंटे पहले ही न्यूज़ीलैंड पहुंची थी लेकिन भारत ने लगातार तीन मुक़ाबलों में जीत हासिल कर ली। दल के कई खिलाड़ी पहली बार न्यूज़ीलैंड में खेल रहे थे और यहां मैदान के अलग-अलग आकार और तेज़ हवा के फ़ैक्टर को भी ध्यान में रखते हुए खेलना था।
पांचवें T20I में हैमिल्टन में न्यूज़ीलैंड की जीत के बाद पोस्ट मैच प्रेस कॉन्फ़्रेंस में गंभीर ने कहा, “जीत से हटकर जिस तरह से इन खिलाड़ियों ने परिस्थितियों में ख़ुद को ढाला और पहले तीन मुक़ाबलों में जिस निर्भीकता के साथ क्रिकेट खेली, ख़ास तौर पर 220 (पहले T20I में 226) चेज़ करना और जब हम विषम परिस्थितियों (दूसरे T20I) में घिरे थे वहां से तीन युवा खिलाड़ियों ने हमें जीत दिलाई।
“और 14 ओवर (से कम) में 199 चेज़ करना और सिर्फ़ एक प्रैक्टिस सेशन के बाद पहला मैच जितना – इसे ही आक्रामकता और बेख़ौफ़ अंदाज़ कहते हैं। हम अगले दो मुक़ाबले भी जीतना चाहते थे, लेकिन कभी-कभी चीज़ें आपके पक्ष में भी नहीं जातीं। तो मुझे लगता है कि सबसे बड़ी उपलब्धि यही है जिस तरह से उन्होंने दबाव को हैंडल किया और जिस तरह से परिस्थितियों में उन्होंने ख़ुद को ढाला और पहले तीन मुक़ाबलों में उन्होंने जिस निर्भीकता के साथ क्रिकेट खेली।
“अगर हमने सीरीज़ नहीं जीती होता तो कोई भी सिर्फ़ एक अभ्यास सत्र की बात नहीं कर रहा होता। तब हर कोई यही कहता, ‘अरे, यह भारतीय टीम कितनी ख़राब है कि विश्व कप के बाद हर चीज़ ग़लत हो रही है।’ यही वास्तविकता है। यह कोई राज़ की बात नहीं है, भारत में लोग सिर्फ़ परिणाम देखते हैं। मेरा काम खिलाड़ियों को उनकी क्षमता के अनुसार उन्हें तैयार करना है और उन तक सभी ज़रूरी जानकारी पहुंचाना है, क्योंकि मैं न्यूज़ीलैंड में इन परिस्थितियों में खेल चुका हूं।
“तो मेरे लिए उन तमाम जानकारी को साझा करना ज़रूरी था और इस बात का प्रयास करना कि वह अच्छे स्पेस में रह सकें और यह सुनिश्चित करना कि वह पूरी तरह से आक्रामक खेल खेल सकें। यह इस तरह की क्रिकेट है जो हम पिछले दो से ढाई साल से खेल रहे हैं – अधिक जोख़िम और अधिक फ़ायदा। हम मुक़ाबले हारेंगे – कई बार हम एकतरफ़ा ढंग से मुक़ाबले हारेंगे और ऐसा भविष्य में भी होगा। लेकिन हमारा इरादा और खेलने का तरीका नहीं बदलेगा।”
बतौर कप्तान पहली दो सीरीज़ हारने के बाद श्रेयस अब तीन द्विपक्षीय T20I सीरीज़ जीत चुके हैं। इसके अलावा श्रेयस की कप्तानी में भारत ने जापान को एकमात्र T20I में हराने के साथ ही एशियन गेम्स में गोल्ड मेडल भी जीता था। गंभीर ने टीम में श्रेयस के प्रभाव की तारीफ़ की और यह समझाया कि क्यों अच्छा प्रदर्शन करना शुरू करने से पहले भारतीय टीम को लचर प्रदर्शन का सामना करना पड़ा।
गंभीर ने कहा, “देखिए, निश्चित तौर पर उन्होंने एक बहुत सफल T20 टीम की कप्तानी संभाली थी। एक ऐसी टीम जिसने विश्व कप जीता था और सबसे ज़रूरी बात उस टीम ने पिछले दो साल में कोई सीरीज़ नहीं हारा था। मुझे नहीं लगता कि विश्व भर में ऐसा ज़्यादा टीमों ने किया है – इस टीम ने दो साल में एक भी सीरीज़ नहीं हारी थी और इसके बाद टीम ने विश्व कप भी जीता था।
“ज़ाहिर तौर पर, हमने चुनौतीपूर्ण विपक्षी टीमों का भी सामना किया। विश्व कप के बाद हम इंग्लैंड गए और हमने कई नए खिलाड़ियों को भी मौक़ा दिया था। टीम में काफ़ी अनुभव की कमी थी। लेकिन यह बड़ा अवसर भी होता है। अगर आप अगले विश्व कप के लिहाज़ से सोचना शुरू करते हैं तो आपको युवा खिलाड़ियों को अवसर देने होंगे।
गंभीर ने कहा, “हां, अभिषेक ने ऑफ़स्पिन के ख़िलाफ़ संघर्ष किया है। जितना वो इस पर बेहतर होंगे वह उतने ही बेहतर खिलाड़ी होते चले जाएंगे। और आपको ख़ुद ही सुधार करना होगा क्योंकि विपक्षी टीम और खिलाड़ी आपके खेल को पढ़ते रहते हैं। जिस तरह से आप बल्लेबाज़ी करते हैं, जिस तरह का स्कोर आप खड़ा करते हैं, जिस गति पर आप बल्लेबाज़ी करते हैं। तो जब आप विभिन्न गेंदबाज़ों के ख़िलाफ़ अपना खेल सुधार लेंगे, तो आप विपक्षी टीम से एक क़दम आगे निकल जाते हैं।
“हम अभी यही बात कर रहे थे। पहले मैच में भी वह ऑफ़स्पिन के ख़िलाफ़ थोड़े फंस गए थे। ऑफ़स्पिन हो या बाएं हाथ के स्पिनर हों, उन्हें क्रैंप करने का प्रयास कर रहे थे। हमने रणनीतिक और तकनीकी पहलू पर बात की थी।”
T20I सीरीज़ में भारत के आक्रामक और निर्भीक अंदाज़ की गंभीर ने की तारीफ़

