जयपुर। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के द्वारा दिए जा रहे बयानों पर पलटवार करते हुए कहा कि गहलोत साहब की कुर्सी की चाह छटपटाहट और खीझ बयानों में स्पष्ट होती है। परिसीमन के नाम पर अनर्गल बयान कर रहे पूर्व मुख्यमंत्री भूल जाते है कि उन्होंने स्वयं मुख्यमंत्री रहते हुए नगर निकायों का किस तरह परिसीमन करवाया था। शहरों में दो—दो नगर निगम बना दिए गए थे, ताकि भाजपा की जीत नहीं हो पाए। उन्होंने समुदाय विशेष के वार्डों की संख्या बढाने का और भाजपा के परम्परागत वार्डो की संख्या सीमित करने का कुकृत्य किया था, वहीं उनको अब याद आ रहा है। आज का बयान भी उसी संदर्भ में माने जाना चाहिए। राठौड़ ने कहा कि बार बार गहलोत राजस्थान में अपने खिलाफ अपनों के द्वारा किए गए विद्रोह को लेकर भाजपा पर सवाल उठाते है, और जिन लोगों ने विद्रोह किया उनके साथ कभी बाइक पर तो कभी आलाकमान के सामने फोटो खिंचवाकर संदेश दे रहे थे कि हम सब एक है। पहले गहलोत स्पष्ट कर लें कि क्या वो सचिन के साथ है या आज भी पायलट को वहीं नाकारा, निकम्मा मानकर दोयम दर्जे का व्यवहार कर रहे है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि अशोक गहलोत महिला आरक्षण और परिसीमन से लोकसभा एवं विधानसभा की सीट बढ़ने पर जिस तरह के बयान दे रहे है, उससे लगता है कि उनके पास आधी अधूरी जानकारी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आप महिला आरक्षण के बिल को सर्व सहमती से पास करवा दीजिए और इसका श्रेय भी आप ही रख लिजिए, लेकिन देश की आधी आबादी को अधिकार देने में बाधा मत बनिए, लेकिन उस समय गहलोत के आलाकमान और स्वयं भू राजकुमार राहुल गांधी ने महिला आरक्षण के माध्यम से महिलाओं को न्याय दिलाने में रोडा बन गए थे। राठौड़ ने कहा कि गहलोत चीन का उदाहरण देते है, लेकिन वो बताए कि चीन से कांग्रेस का अधिकृत रूप से क्या समझौता है, जिस पर साइन हुए थे। चीन के साथ तो कांग्रेस का अधिकृत समझौता है, जो आज तक देश की जनता को नहीं बताया गया। आखिर ऐसा क्या है जिसे छिपाया जा रहा है। वे देश के वरिष्ठ नेता है, बयानों में देश की चिंता करते तो कम से कम वो चीन के साथ हुए एमओयू को सार्वजनिक कर दें। जिस समझौते पर देश के सर्वोच्च न्यायालय ने भी टिप्पणी करते हुए कहा था कि “एक राजनीतिक दल दूसरे देश की सरकार या दल के साथ समझौता कैसे कर सकता है?”
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कहा कि परिसीमन तो 2024 में हुआ है लेकिन कांग्रेस तो कई प्रदेशों में चार—चार दशक से सत्ता से बाहर है। ऐसे में परिसीमन पर ठिकरा फोड़कर कांग्रेस अपनी नाकामियों को छिपाने की कोशिश कर रही है। राठौड़ ने कहा कि भाजपा वर्षों तक विपक्ष में रही, जनता के साथ विश्वास बनाया और जब सरकार में आती है तो जनता की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का काम करती है। ये ही कारण है कि हर दशक में भारतीय जनता पार्टी का ग्राफ बढ़ता गया और हर दशक में कांग्रेस का ग्राफ गिरता चला गया। राठौड़ ने कहा कि वे कहते है कि सुप्रीम कोर्ट में जाना चाहिए, लेकिन हर जगह की अपनी व्यवस्था और मर्यादा होती है, यदि उसका पालन नहीं करेंगे तो फिर देश का लोकतांत्रित ढ़ांचा चरमरा जाएगा तथा देश में अराजकता का माहौल होगा। कांग्रेस ना देश की जनता के जनादेश को मानती है ना ही बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के लिखे संविधान की व्यवस्थाओं को मानती है। राहुल गांधी को लगता है कि वो जो कह दें, जिस तरह कांग्रेस में माना जाता है,गहलोत जी मानते है, उसी प्रकार देश की न्याय पालिका, चुनाव आयोग, कार्य पालिका मानती चली जाए।
परिसीमन पर ठिकरा फोड़कर कांग्रेस अपनी नाकामियों को छिपाने की कर रही है कोशिश: मदन राठौड़


