नई दिल्ली। आख़िरकार छठे प्रयास में इस सीरीज़ में किसी टीम ने अपने स्कोर का सफलतापूर्वक बचाव किया। पिछले दो हफ़्तों में जो कुछ हुआ, उसे देखते हुए भारत के 223 रन बहुत बड़े स्कोर नहीं लग रहे थे। लेकिन इंदौर की पिच पर कम उछाल के कारण बड़े शॉट लगाना मुश्किल था और वहां अभिषेक शर्मा ने 30 गेंदों पर 69 रन बनाकर भारत को पार स्कोर से बेहतर टोटल तक पहुंचा दिया।
भारतीय गेंदबाज़ों ने ओस ना आने का पूरा फ़ायदा उठाया। अर्शदीप सिंह ने नई गेंद के साथ आख़िरकार शे होप को कम स्कोर पर आउट किया और फिर डेथ ओवरों में भी बेहतरीन गेंदबाज़ी की। भारत ने अपनी रणनीति को बेहद सटीक रखा और पूरी पारी के दौरान वेस्टइंडीज़ को लगातार लक्ष्य से थोड़ा दूर रखा।
रांची के 3.3-0-63-0 के आंकड़ों के बाद वापसी करते हुए अक्षर पटेल बीच के ओवरों में वेस्टइंडीज़ की रन गति पर लगाम लगाने में सफल रहे। वहीं पार्ट-टाइमर नमन धीर और नीतीश कुमार रेड्डी ने भी अपना काम किया। अर्शदीप और प्रिंस यादव ने अंतिम ओवरों में सटीक यॉर्कर डालकर 20वें ओवर से काफ़ी पहले ही मैच को भारत की झोली में डाल दिया।
पिछले मैच में वेस्टइंडीज़ ने गेंद के साथ अपने हीरो रॉस्टन चेज़ पर भरोसा किया था, लेकिन अभिषेक ने आक्रामक रुख़ अपनाने से पहले ख़ुद को थोड़ा समय दिया। पहले आक्रमण की ज़िम्मेदारी संजू सैमसन पर थी, लेकिन दूसरे ओवर में वह मिडविकेट पर कैच दे बैठे। इससे चेज़ को पारी की शुरुआत में दो बाएं हाथ के बल्लेबाज़ों को गेंदबाज़ी करने का मौक़ा मिला।
हालांकि, अभिषेक ने चेज़ को सिर्फ़ एक ओवर तक अपनी योजना के मुताबिक गेंदबाज़ी करने दी। उनके दूसरे ओवर में उन्होंने जगह बनाई और दो छक्के और एक चौका लगाया। इशान किशन भी कीमो पॉल के ख़िलाफ़ आक्रामक हो गए और भारत पावरप्ले में एक विकेट पर 87 रन के स्कोर तक पहुंच गया। अभिषेक ने अपने 69 में से 50 रन ऑफ़ साइड में बनाए। किसी अंतरराष्ट्रीय पारी में उन्होंने सिर्फ़ एक बार इससे ज़्यादा ऑफ़-साइड रन बनाए हैं। इसी दौरान वह गेंदों के हिसाब से 2000 T20I रन तक सबसे तेज़ पहुंचने वाले बल्लेबाज़ (1024 गेंद) बने।
थोड़ी देर आराम करने के बाद चेज़ ने किशन को 18 गेंदों पर 37 रन के स्कोर पर स्टंप कराकर अपना बदला ले लिया। किशन के आउट होने के तुरंत बाद पहली बार यह साफ़ हुआ कि यह पिच रांची की तरह बल्लेबाज़ी के लिए बिल्कुल आसान नहीं थी। मध्य क्रम के बल्लेबाज़ अभिषेक और किशन द्वारा दी गई शुरुआत का फ़ायदा नहीं उठा पाए और लगातार विकेट गंवाते रहे।
तिलक वर्मा एक बार फिर शानदार लय में दिख रहे थे, लेकिन वह अजीबोगरीब तरीक़े से रनआउट हो गए। अक्षर पटेल ने लेग साइड की ओर एक शॉट खेली और वर्मा को लगा कि गेंद सीमा रेखा पार कर गई है और वह उसे चौका मानकर क्रीज़ के बीच में ही रूक गए। इसके थोड़े समय बाद अक्षर भी अर्शदीप को सिंगल के लिए तब मना नहीं कर सके, जब रन लेना संभव नहीं था।
दूसरी पारी की शुरुआत में नई गेंद के साथ बल्लेबाज़ों के लिए मनमुताबिक शॉट लगाना कितना मुश्किल था, यह और साफ़ हो गया। मयंक यादव ने पहले ओवर में थोड़ी सीम मूवमेंट हासिल की, लेकिन अर्शदीप ने कोई जोखिम नहीं लिया। वह होप के ख़िलाफ़ राउंड द विकेट से आए और दो यॉर्कर बिल्कुल सही जगह पर डालने के बाद उन्हें लेंथ गेंद से बोल्ड कर दिया।
शिमरॉन हेटमायर ने अर्शदीप के दूसरे ओवर में 19 रन बनाकर वेस्टइंडीज़ की धीमी शुरुआत को तोड़ा। लेकिन मयंक और प्रिंस ने पावरप्ले का अच्छा अंत किया और वेस्टइंडीज़ को 54 रन पर सीमित रखा।
कामिल पूरन के लिए एक रन प्रति गेंद से ज़्यादा तेज़ी से रन बनाना मुश्किल हो रहा था, इसलिए हेटमायर को ज़्यादा जोखिम उठाने पड़े। इसका नतीजा यह हुआ कि सातवें ओवर में नमन धीर ने इस सीरीज़ में अपना चौथा विकेट हासिल किया। एक बार फिर उन्होंने छक्का खाने के बाद विकेट लिया।
अक्षर और धीर ने अगले दो ओवरों में वेस्टइंडीज़ को पूरी तरह रोक दिया और 10वें ओवर में रोवमन पॉवेल का विकेट गिरने के साथ उनका स्कोर 82 रन पर तीन विकेट था। पूरन ने धीर के तीसरे ओवर में हर गेंद पर बड़ा शॉट खेलने की बेताब कोशिश की। उन्होंने तीन छक्के लगाए और अपना स्ट्राइक रेट थोड़ा सुधारा, लेकिन चौथी कोशिश में वह बाउंड्री पर कैच दे बैठे। धीर के अब पांच अंतरराष्ट्रीय विकेट हो गए थे और ये सभी उस गेंद के तुरंत बाद आए थे, जिस पर उन्हें छक्का पड़ा था।
क्विंटन सैम्पसन के क्रीज़ पर आते ही श्रेयस अय्यर ने फिर तेज़ गेंदबाज़ी का रुख़ किया। सैम्पसन को तेज़ गति की गेंदों पर उसी तरह शॉट लगाना मुश्किल होता है, जैसे वह स्पिन के ख़िलाफ़ करते हैं। शरफ़ेन रदरफ़ोर्ड और सैम्पसन ने अगले साढ़े चार ओवर तक वेस्टइंडीज़ को मुक़ाबले में बनाए रखा।
आख़िरी चार ओवर में 65 रन चाहिए थे और वेस्टइंडीज़ को अब रदरफ़ोर्ड के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन की ज़रूरत थी, लेकिन अर्शदीप और प्रिंस अपनी यॉर्कर पर अच्छी तरह अमल करते दिखे, जिससे रदरफ़ोर्ड के लिए काम कुछ ज़्यादा ही मुश्किल हो गया। अय्यर अपने सर्वश्रेष्ठ गेंदबाज़ों से लगातार गेंदबाज़ी कराते रहे ताकि आख़िरी ओवर में अक्षर के पास बचाव के लिए 36 रन हों।
अभिषेक, अर्शदीप और धीर की पंजाबी तिकड़ी ने भारत को दिलाई सीरीज़ में 2-1 की बढ़त


