लाभान्वित कंपनी के दो डायरेक्टर हरियाणा से गिरफ्तार, देशभर में 250 से अधिक शिकायतें
विकासा कैपिटल नाम से फर्जी पोर्टल बनाकर जयपुर के डॉक्टर से हड़पे थे 61.77 लाख रुपये
जयपुर । महानिदेशक पुलिस राजस्थान राजीव कुमार शर्मा के निर्देशानुसार साइबर अपराधों की रोकथाम एवं साइबर अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत राजस्थान पुलिस की स्टेट साइबर क्राइम थाना पुलिस टीम ने बड़ी सफलता हासिल करते हुए व्हाट्सएप एवं टेलीग्राम के माध्यम से फर्जी ऑनलाइन ट्रेडिंग एवं आईपीओ निवेश के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले अंतर्राज्यीय गिरोह के दो प्रमुख सदस्यों को गिरफ्तार किया है।
अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम विजय कुमार सिंह ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों की पहचान देवेन्द्र शर्मा एवं निखिल लुथरा निवासी नजफगढ़ दिल्ली के रूप में हुई है। दोनों टेरापल्स प्राइवेट लिमिटेड (TERRAPULSE PRIVATE LIMITED) कम्पनी के डायरेक्टर हैं और इन्हें फरीदाबाद हरियाणा से गिरफ्तार किया गया। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गिरोह ने देशभर में करीब 50 से 60 करोड़ रुपये की साइबर धोखाधड़ी को अंजाम दिया है।
जयपुर के डॉक्टर से 61.77 लाख की ठगी से खुला पूरे नेटवर्क का राज
स्टेट साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में 23 जनवरी 2025 को परिवादी डॉ. निखिल मेहता ने शिकायत दर्ज कराई कि गूगल और सोशल मीडिया पर विकासा कैपिटल (VIKASA CAPITAL) नामक निवेश पोर्टल के माध्यम से उन्हें आईपीओ, अमेरिकी एवं भारतीय शेयर बाजार में निवेश पर आकर्षक एवं सुनिश्चित लाभ का लालच दिया गया। इसके बाद व्हाट्सएप और टेलीग्राम के जरिए फर्जी लिंक भेजकर मोबाइल में नकली एप्लीकेशन इंस्टॉल करवाई गई तथा निवेश पर लगातार काल्पनिक लाभ दिखाकर विश्वास में लिया गया।
आरोपियों ने शुरुआत में कम राशि निवेश करवाकर एक बार छोटी रकम की निकासी भी करवाई, जिससे परिवादी का भरोसा बढ़ गया। बाद में “सत्कार शॉपिंग आईपीओ” सहित विभिन्न निवेश योजनाओं में अधिक लाभ का लालच देकर “पीजी एंटरप्राइजेज”, “एसके एंटरप्राइजेज”, “टेरापल्स प्राइवेट लिमिटेड”, “राधा माधब वैराइटीज”, “पर्थ ट्रेडर्स” और “प्रिशा एंटरप्राइजेज” जैसी फर्मों के बैंक खातों में कुल 61.77 लाख रुपये जमा करवा लिए। जब परिवादी ने राशि निकालने का प्रयास किया तो पोर्टल पर विदेशी नियामक संस्था द्वारा खाता ब्लॉक किए जाने का झूठा संदेश दिखाकर निकासी रोक दी गई और आरोपी संपर्क से गायब हो गए।
तकनीकी एवं वित्तीय विश्लेषण से आरोपियों तक पहुंची पुलिस
साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन, राजस्थान, जयपुर की टीम ने तकनीकी एवं वित्तीय साक्ष्यों, साइबर पुलिस पोर्टल तथा आईसीजेएस पोर्टल का गहन विश्लेषण कर ठगी में प्रयुक्त बैंक खातों का पता लगाया। जांच में सामने आया कि टेरापल्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम से आईडीएफसी बैंक एवं एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में चालू खाते खोलकर साइबर ठगी की रकम प्राप्त की जाती थी और तुरंत अन्य खातों में ट्रांसफर कर दी जाती थी।
पूछताछ में आरोपियों ने स्वीकार किया कि फर्म का उपयोग साइबर धोखाधड़ी से प्राप्त राशि को विभिन्न खातों में स्थानांतरित करने के लिए किया जाता था। अब तक की जांच में इनके बैंक खातों से संबंधित करीब 25 करोड़ रुपये की 40 शिकायतें तथा 10 से अधिक आपराधिक प्रकरण विभिन्न राज्यों में दर्ज होना सामने आया है।
देशभर में 250 से अधिक शिकायतें, जांच जारी
एडीजी सिंह ने बताया कि लाभान्वित बैंक खातों के विश्लेषण में इस गिरोह के विरुद्ध साइबर क्राइम पोर्टल पर 250 से अधिक शिकायतें दर्ज मिली हैं, जबकि 50 से अधिक एफआईआर देश के विभिन्न राज्यों में पंजीकृत हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि ठगी की वास्तविक राशि इससे कहीं अधिक हो सकती है। पुलिस अन्य बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल साक्ष्यों का विश्लेषण कर गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान एवं गिरफ्तारी के प्रयास कर रही है।
गिरफ्तारी करने वाली टीम
साइबर क्राइम पुलिस थाना जयपुर में थानाधिकारी एवं उप अधीक्षक पुलिस श्री गजेन्द्र शर्मा के नेतृत्व में गठित टीम में पुलिस निरीक्षक अजय शर्मा, कांस्टेबल कृष्ण कुमार, जितेन्द्र कुमार, लेखराज तथा चालक कांस्टेबल सुबेसिंह शामिल रहे।
आमजन के लिए साइबर सुरक्षा सलाह
- गारंटीड या असामान्य मुनाफे का दावा करने वाले निवेश प्रस्तावों से सतर्क रहें।
- केवल अधिकृत एवं पंजीकृत निवेश प्लेटफॉर्म पर ही निवेश करें।
- सोशल मीडिया, व्हाट्सएप या टेलीग्राम पर मिले निवेश प्रस्तावों पर बिना सत्यापन भरोसा न करें।
- ओटीपी, यूपीआई, पिन, सीवीवी, पासवर्ड एवं बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा न करें।
- किसी भी कंपनी या निवेश योजना में पैसा लगाने से पहले उसका पंजीकरण एवं वैधता अवश्य जांचें।
- संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें तथा केवल आधिकारिक वेबसाइट या ऐप का ही उपयोग करें।


