मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कर दिखाया वह काम, जिसे कांग्रेस छह सरकारों में भी नहीं कर सकी
जयपुर।राजस्थान की राजनीति में आज एक नया इतिहास लिखा गया है। 32 वर्षों से फाइलों में दफन पड़ा यमुना जल समझौता आखिरकार मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के दृढ़ संकल्प, सतत प्रयासों और राजनीतिक इच्छाशक्ति के कारण साकार हुआ। यह केवल एक जल समझौता नहीं, बल्कि कांग्रेस की तीन दशक लंबी विफल राजनीति पर विकास और परिणाम की निर्णायक विजय है।
वर्ष 1994 में यमुना जल बंटवारे का समझौता हुआ, लेकिन राजस्थान को उसका वैधानिक अधिकार कभी नहीं मिला। इस बीच प्रदेश में कांग्रेस और अन्य दलों की कई सरकारें आईं और चली गईं। केंद्र में भी कांग्रेस का एक दशक तक शासन रहा, लेकिन राजस्थान के हिस्से का पानी दिलाने के लिए न गंभीर वार्ता हुई, न राजनीतिक दबाव बनाया गया और न ही कोई ठोस परिणाम सामने आया। कांग्रेस ने शेखावाटी की प्यास को केवल चुनावी मुद्दा बनाया, समाधान का कभी संकल्प नहीं लिया।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सत्ता संभालते ही स्पष्ट कर दिया था कि राजस्थान के हितों से कोई समझौता नहीं होगा। पिछले ढाई वर्षों में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार, केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह, केंद्रीय जल संसाधन मंत्री श्री सी आर पाटिल तथा हरियाणा सरकार के साथ लगातार संवाद स्थापित किया। परिणामस्वरूप वर्षों से बंद पड़े रास्ते खुले और आज राजस्थान को उसका अधिकार सुनिश्चित करने की दिशा में ऐतिहासिक सफलता मिली।
1917 क्यूसेक यमुना जल और लगभग 295 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन के माध्यम से पानी की उपलब्धता केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि राजस्थान की जल सुरक्षा का नया अध्याय है। इससे शेखावाटी के झुंझुनूं, सीकर, चूरू सहित अनेक क्षेत्रों में पेयजल संकट कम होगा, भूजल पर निर्भरता घटेगी, गिरते जलस्तर को संभालने में सहायता मिलेगी, किसानों को राहत मिलेगी, उद्योगों के लिए पानी उपलब्ध होगा और क्षेत्रीय विकास को नई गति मिलेगी। वर्षों से पानी के लिए टैंकरों और गहराते भूजल संकट से जूझ रहे क्षेत्रों के लिए यह जीवन बदलने वाला निर्णय सिद्ध होगा।
सबसे बड़ा प्रश्न कांग्रेस से की 32 वर्षों तक परिणाम क्यों नहीं आए?
क्या कारण था कि राजस्थान का जल अधिकार केवल भाषणों तक सीमित रहा? क्या कारण था कि हर चुनाव में शेखावाटी में जल के नाम पर वोट मांगे गए, लेकिन दिल्ली और हरियाणा के सामने राजस्थान का पक्ष मजबूती से कभी नहीं रखा गया?
विडंबना तो तब और बढ़ गई जब हरियाणा विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस के घोषणा-पत्र में राजस्थान को यमुना का एक बूंद पानी तक नहीं देने का वादा किया गया। यह केवल एक चुनावी घोषणा नहीं थी, बल्कि राजस्थान के स्वाभिमान और करोड़ों लोगों की प्यास के साथ राजनीतिक खिलवाड़ था। आश्चर्य यह है कि उसी समय शेखावाटी और राजस्थान कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरियाणा में कांग्रेस के पक्ष में चुनाव प्रचार करते रहे, लेकिन किसी ने भी राजस्थान के जल अधिकारों की रक्षा के लिए सार्वजनिक रूप से आवाज नहीं उठाई। यह मौन बताता है कि कांग्रेस के लिए पार्टी पहले और राजस्थान बाद में रहा।
इसके विपरीत, भाजपा सरकार ने कभी टकराव की राजनीति नहीं की, बल्कि सहकारी संघवाद की भावना के साथ संवाद, विश्वास और परिणाम का रास्ता चुना। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने दिखा दिया कि मजबूत नेतृत्व केवल बयान नहीं देता, बल्कि दशकों से अटकी फाइलों को मंजिल तक पहुंचाता है।
यह समझौता उस ‘राजनीति बनाम परिणाम’ का सबसे बड़ा उदाहरण है, जिसमें एक ओर कांग्रेस की दशकों पुरानी वादाखिलाफी है और दूसरी ओर भाजपा सरकार का परिणाम आधारित सुशासन।
आज राजस्थान का हर नागरिक देख रहा है कि
- कांग्रेस ने 32 वर्षों तक केवल वादे किए, उसने पानी नहीं दिया।
- मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने ढाई वर्षों तक निरंतर प्रयास किए, उसने समाधान दिया।
- कांग्रेस ने केवल राजनीति की, वह इतिहास बन गया।
- मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने परिणाम दिए और आज वे राजस्थान का भविष्य लिख रहे हैं।
मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने यह भी सिद्ध कर दिया है कि राजनीतिक इच्छाशक्ति ही सबसे बड़ी प्रशासनिक शक्ति होती है। निर्णय लेने का साहस हो, स्पष्ट दृष्टि हो और जनता के प्रति प्रतिबद्धता हो तो दशकों पुराने विवाद भी सुलझाए जा सकते हैं।
आज का यह समझौता केवल शेखावाटी की प्यास बुझाने का माध्यम नहीं है, बल्कि राजस्थान को जल-सुरक्षित बनाने की दीर्घकालिक रणनीति का महत्वपूर्ण आधार है। यह राज्य के आर्थिक विकास, औद्योगिक निवेश, कृषि उत्पादकता, शहरी विस्तार और भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का मजबूत आधार बनेगा।
इस नए राजस्थान में सरकारें फाइलें नहीं, फैसले चलाती हैं; घोषणाएं नहीं, परिणाम देती हैं; और जहां 32 वर्षों की प्रतीक्षा को ढाई वर्षों की प्रतिबद्धता समाप्त कर देती है।
यमुना जल समझौता केवल एक हस्ताक्षर नहीं, बल्कि यह प्रमाण है कि जब नेतृत्व निर्णायक हो, नीयत साफ हो और संकल्प अटल हो, तब इतिहास बदलता है। आज मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने वही इतिहास रचा है।


