डॉ. महेश जांगिड़ की विशेषज्ञता से टली जानलेवा स्थिति
जयपुर। नव इम्पीरियल हॉस्पिटल: चिकित्सा के क्षेत्र में कई बार ऐसे केस सामने आते हैं जो ना केवल चुनौतीपूर्ण होते हैं, बल्कि समय पर इलाज न हो तो मरीज़ की जान भी जा सकती है। ऐसा ही एक मामला हाल ही में जयपुर के नव इम्पीरियल हॉस्पिटल में सामने आया, जहाँ एक 35 वर्षीय मरीज़ को लगातार पेट दर्द और उल्टी की शिकायत के बाद भर्ती किया गया। मरीज़ की प्रारंभिक बाहर कराई गई जाँच में पित्ताशय (Gallbladder) में सूजन एव स्लज की पुष्टि हुई, लेकिन मरीज़ की स्थिति और लक्षण सामान्य से अधिक जटिल प्रतीत हो रहे थे। ऐसे में वरिष्ठ लैप्रोस्कोपिक सर्जन डॉ. महेश जांगीड़ ने अपने अनुभव और क्लिनिकल निरीक्षण के आधार पर मरीज़ की विस्तृत जांच का निर्णय लिया।

मरीज़ की लैप्रोस्कोपिक सर्जरी के दौरान डॉक्टरों ने उसके पेट के अंदर एक नुकीली 5cm हड्डी पाई, जो उसने अनजाने में किसी नोनवेज भोजन के साथ निगल ली थी। यह हड्डी आमाशय की दीवार में छेद (Perforation) कर चुकी थी। ऐसी स्थिति में पाचन तंत्र से निकलने वाले जीवाणु और द्रव्य पेट में फैल सकते हैं, जिससे गंभीर संक्रमण (Peritonitis) होता है !, अगर सर्जरी समय पर ना करी जाती तो सेप्सिस और (Organ Failure) का ख़तरा बन जाता है।
डॉ. महेश जांगिड़ और उनकी टीम ने समय रहते स्थिति को समझते हुए हड्डी को सुरक्षित रूप से निकाला और आमाशय में हुए छेद को सटीक तकनीक से रिपेयर किया। यह पूरी प्रक्रिया लेप्रोस्कोपिक विधि से की गई, जिससे मरीज़ को बड़ी सर्जरी की आवश्यकता नहीं पड़ी और रिकवरी तेज़ हुई। इस सर्जरी के बाद मरीज़ को कुछ दिनों तक निगरानी में रखा गया और अब उसकी हालत पूरी तरह स्थिर है। उसे जल्द ही अस्पताल से छुट्टी कर दी गई !
डॉ. महेश जांगिड़ ने बताया, “ऐसे केस बहुत कम देखने को मिलते हैं, लेकिन यही उदाहरण हमें यह समझाते हैं कि मरीज के लक्षणों को कभी हल्के में नहीं लेना चाहिए। यदि हमने इसे सिर्फ एक सामान्य पेट दर्द मानकर इलाज किया होता, तो यह केस गंभीर जटिलता का रूप ले सकता था।”
