40 वर्षों से थाने में सेवा दे रही ललिता देवी की बेटियों के विवाह में पुलिस परिवार बना सहारा, नकद राशि, सिलाई मशीनें और कपड़े भेंट कर भरा मायरा
जयपुर। कहते हैं कि रिश्ते सिर्फ खून के नहीं होते, बल्कि अपनापन और फर्ज के भी होते हैं। राजस्थान के नारायणपुर पुलिस थाने ने इस बात को सच कर दिखाया है। यहाँ पुलिसकर्मियों ने मिसाल पेश करते हुए एक सफाई कर्मी महिला की दो बेटियों की शादी में भाई बनकर मायरा (भात) भरा और समाज को मानवता का अनूठा संदेश दिया।
40 वर्षों का साथ, अब बना अटूट रिश्ता
श्रीमती ललिता देवी पत्नी कैलाश चंद निवासी वाल्मीकि मोहल्ला नारायणपुर पिछले लगभग 40 वर्षों से नारायणपुर थाने में सफाई कर्मी के रूप में अपनी सेवाएं दे रही हैं। पूरा थाना उन्हें अपने परिवार का हिस्सा मानता है। जब ललिता देवी की दो बेटियों अंजू और संजू की शादी 11 मार्च 2026 को तय हुई तो एक बड़ी चिंता सामने आई; ललिता देवी का कोई भाई नहीं था जो मायरे की रस्म निभा सके।

जैसे ही यह बात थाने के स्टाफ को पता चली, उपमहानिरीक्षक एवं पुलिस अधीक्षक कोटपूतली-बहरोड़ देवेन्द्र विश्नोई के मार्गदर्शन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नाजिम अली खान के निर्देशन में वृत्ताधिकारी बानसूर मेधा गोयल और थानाधिकारी नारायणपुर रोहिताश मय समस्त जाब्ता ने खुद भाई की जिम्मेदारी उठाने का फैसला किया।
नगद राशि और उपहारों से सजा ऐतिहासिक मायरा
मंगलवार 10 मार्च को नारायणपुर पुलिस थाने का समस्त स्टाफ गाजे-बाजे के साथ ललिता देवी के घर पहुँचा। पुलिसकर्मियों ने भाई का फर्ज निभाते हुए ₹1,61,000 नगद राशि, दो सिलाई मशीनें, दोनों बेटियों के लिए 5-5 जोड़ी कपड़े और सम्पूर्ण परिवार के लिए नए वस्त्र और अन्य आवश्यक सामग्री भेंट स्वरूप दिए।
भावुक हुई ललिता देवी, क्षेत्र में हो रही प्रशंसा
जब पुलिस अधिकारी और जवान सिर पर साफा बांधकर मायरा लेकर पहुंचे, तो ललिता देवी की आंखें छलक आईं। उन्होंने कभी सोचा नहीं था कि उनके थाने वाले भाई इस तरह खुशियों में शरीक होंगे। स्थानीय ग्रामीणों ने पुलिस के इस मानवीय चेहरे की जमकर तारीफ की है।
