वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने पर अनूठा आयोजन, राष्ट्रप्रेम और सुधार का संदेश
जयपुर। दौसा के विशिष्ट केंद्रीय कारागृह श्यालावास में देशभक्ति और राष्ट्रीयता की भावना से ओतप्रोत एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह आयोजन वंदे मातरम् राष्ट्रगीत के 150 वर्ष पूर्ण होने के ऐतिहासिक अवसर पर किया गया। इस दौरान कारागृह के मैदान में लगभग चार सौ बंदियों और जेल स्टाफ़ ने मिलकर एक विशाल मानव श्रृंखला बनाई, जिससे जमीन पर वंदे मातरम् शब्द की आकृति तैयार हुई। बंदी संदीप अग्रवाल, विकास शर्मा और दीनदयाल ने इस आकृति को बनाने में महत्वपूर्ण सहयोग किया।
एकता और समर्पण का प्रतीक
इस दौरान बंदियों ने पूरे जोश के साथ तिरंगा झंडा लहराया, जिससे पूरा वातावरण देशभक्ति के नारों से गूंज उठा। जेल अधीक्षक पारस जांगिड़ ने इस आयोजन के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह कार्यक्रम देश की एकता, अखंडता और मातृभूमि के प्रति समर्पण का प्रतीक है। उन्होंने जोर दिया कि भारत माता की आराधना केवल शब्दों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि वह कर्म में भी झलकनी चाहिए।
अधीक्षक जांगिड़ ने बताया कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य बंदियों में सुधार लाना और उनमें राष्ट्रभावना को जागृत करना है। इस तरह के कार्यक्रम बंदियों को सकारात्मक दिशा देते हैं और उन्हें मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित करते हैं। बंदियों ने सामूहिक रूप से देशभक्ति गीतों और नारों के माध्यम से देश के प्रति अपनी निष्ठा प्रकट की।
कार्यक्रम में जेलर विकास बागोरिया, उप जेलर दिलावर ख़ान, प्लाटून कमांडर मनेश कुमार और अन्य अधिकारी भी उपस्थित रहे, जिन्होंने बंदियों के साथ मिलकर इस राष्ट्रीय भावना के प्रदर्शन में हिस्सा लिया। कार्यक्रम का समापन सामूहिक रूप से वंदे मातरम् राष्ट्रगीत के गान से हुआ, जिससे पूरा कारागृह परिसर देशभक्ति की ऊर्जा से भर गया।
देशभक्ति से गूंजा श्यालावास कारागृह: बंदियों ने मिलकर बनाई विशाल वंदे मातरम् मानव श्रृंखला
