जयपुर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ’मेक इन इंडिया’ और ’इन्वेस्ट इन इंडिया’ जैसी पहल देश में महत्वपूर्ण निवेश आकर्षित करने में सहायक रही हैं। प्रधानमंत्री के इस विजन को आगे बढ़ाते हुए, मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के नेतृत्व में वर्तमान राजस्थान सरकार ने अपने पहले वर्ष में राइजिंग राजस्थान समिट का शुभारंभ किया है, जिसका उद्देश्य राज्य भर में निवेश को बढ़ावा देना और रोजगार पैदा करना है। विकास को गति देने के लिए विभिन्न जिलों में कई निवेश समझौते और एमओयू पर हस्ताक्षर किए जा रहे हैं। कृषि में निवेश बढ़ने से मशीनीकरण और प्रौद्योगिकी में वृद्धि होगी, जिससे राज्य की उत्पादकता भी बढ़ेगी। यह कहना है राजस्थान किसान आयोग के अध्यक्ष, सी.आर. चौधरी का।
चौधरी ने आगे कहा कि राजस्थान, जो भारत का सबसे बड़ा राज्य है, सरसों, ज्वार और तिलहन के उत्पादन में देश में प्रथम स्थान पर है, तथा अनाजों (मिलेट्स) एवं मूंगफली में दूसरे स्थान पर, सोयाबीन, चना एवं दालों में तृृतीय स्थान पर है। उन्होंने जोधपुर, कोटा, गंगानगर और अलवर जैसे शहरों में फूड पार्क के विकास तथा बीकानेर में भी एक फूड पार्क बनाने की योजना पर प्रकाश डाला। उन्होंने ’ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (ईओडीबी) रैंकिंग में राज्य की प्रभावशाली प्रगति का भी उल्लेख किया, जो 2014 में 132 से सुधरकर आज 63 हो गई है, जो अधिक निवेशक-अनुकूल वातावरण का संकेत है।
मुख्य सचिव सुधांश पंत ने राज्य के कृषि और अलाइड क्षेत्रों की गतिशील प्रकृति पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रति बूंद अधिक फसल मिशन की राजस्थान के लिए उपयोगिता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सरकार के पहले वर्ष में शुरू की गई राइजिंग राजस्थान जैसी निवेश-केंद्रित पहल, निवेशकों को अगले चार वर्षों में उनकी परियोजनाओं के समय पर क्रियान्वयन के बारे में आश्वस्त करेगी। उन्होंने कृषि नवाचार को आगे बढ़ाने के लिए एक प्रमुख मंच के रूप में ग्लोबल राजस्थान एग्रीटेक मीट (ग्राम) को फिर से आयोजित करने के लिए विचार करने पर जोर दिया। मिलैट उत्पादन में राजस्थान की अग्रणी स्थिति पर प्रकाश डालते हुए श्री पंत ने फसल की क्षमता को प्रदर्शित करने और स्थानीय किसानों को समर्थन देने के लिए सरकारी कार्यालयों और कार्यक्रमों के माध्यम से मिलैट्स को बढ़ावा देने का आग्रह किया।
उल्लेखनीय है कि प्री समिट में कृषि एवं सम्बद्ध विभागों के 862 निवेशकों के 19 हजार 497 करोड़ रूपये से ज्यादा निवेश के एम.ओ.यू. प्राप्त हो चुके है, जिनमें कृषि विपणन विभाग के 693, उद्यानिकी के 121, कृषि के 23, राजस्थान जैविक प्रमाणीकरण संस्था के 9, पशुपालन एवं डेयरी के 7, बीज निगम के 4, मत्स्य विभाग के 3, और सहकारिता विभाग के 2 निवेशकों के प्रस्ताव प्राप्त हुए है।
भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सचिव, डॉ. देवेश चतुर्वेदी ने किसानों को कृषि उद्यमी के रूप में देखने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कृषि में नवाचार और विकास को बढ़ावा देने के लिए किसानों और प्राइवेट सेक्टर के बीच सहयोग के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि फसल विविधीकरण लंबे समय तक टिकाउ खेती के लिए महत्वपूर्ण है, जबकि प्राकृतिक कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने से उर्वरक लागत में काफी कमी आ सकती है। डॉ. चतुर्वेदी ने डिजिटल खेती के लाभों पर भी प्रकाश डाला, जिससे कृषि दक्षता में वृद्धि, लागत में कमी, फसल की पैदावार में सुधार और पर्यावरणीय दुष्प्रभाव में कमी आ सकती है, जिससे यह खेती के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में उपयोग किया जा सकता है।
शासन सचिव कृषि एवं उद्यानिकी राजन विशाल ने राज्य की कृषि रणनीति में “4 पी“ – ’प्रोडक्टिविटी’, ’प्रोक्योरमेंट’, ’प्रोसेसिंग’ और ’पोपुलराइजेशन’ – पर ध्यान केंद्रित करने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने किसानों की आय दोगुनी करने में मदद करने के लिए प्रौद्योगिकीय उन्नति और नवीन समाधानों की आवश्यकता पर बल दिया। इसके साथ ही उनकी आजीविका को सुनिश्चित करने के लिए उन्हें स्थायी एवं टिकाउ प्रथाओं को अपनाने के लिए सशक्त बनाने पर भी जोर दिया।
कृषि में निवेश से मशीनीकरण और उत्पादकता बढ़ेगी- अध्यक्ष, राजस्थान किसान आयोग
