जयपुर। राजस्थान पर्यटन विभाग द्वारा जयपुर जिला प्रशासन, जयपुर नगर निगम एवं पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के सहयोग से राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा और पर्यटन पहचान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर और सशक्त करने वाले भव्य काईट फेस्टिवल के दूसरा चरण बुधवार को हवामहल के सामने आयोजित हुआ।
हवामहल की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि में भव्य आतिशबाज़ी-
उपमुख्यमंत्री तथा पर्यटन मंत्री दिया कुमारी की गरिमा मयी उपस्थिति में पतंग उत्सव के दूसरे चरण में हुई भव्य आतिशबाजी से गुलाबी नगर का परकोटा आतिशबाजी की रंगीन रोशनी में नहाया। आसमान में जगमगाती रौशनी ने चमकदार रंग भर दिए।

आसमानी फूलझड़ियों, रॉकेट, पटाखों के सुरीले धमाकों और गड़गड़ाहट से सारा वातावरण गुंजायमान हो उठा। यहां हजारों की संख्या में मौजूद दर्शक टकटकी लगाए आसमान में खिलखिलाते हुए सितारों को निहारत रहे। जोश, उमंग, उत्साह से अद्भुत समा बंध गया। आतिशि सितारों से चमचमाता ऐसा नजारा शायद ही पहले कभी इस क्षेत्र में नज़र आया हो।
दिनभर के सांस्कृतिक और पारंपरिक उत्सव के बाद शाम 6.30 बजे से पतंग उत्सव के दूसरे चरण में लालटेन उड़ाने का विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। गुलाबी शहर के आसमान में रोशनी और रंगों से सजी आतिशबाज़ी ने इस काईट फेस्टिवल का यादगार समापन किया।
राजस्थान केवल देखने की जगह नहीं, बल्कि एक अद्वितीय अनुभव-
उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने पतंग उत्सव के द्वितीय चरण के भव्य आतिशी समापन के अवसर पर कहा कि यह तो अभी शुरुआत है जयपुर और राजस्थान आगे भी ऐसे शानदार संस्कृति से पूर्ण और भव्य अवसरों का साक्षी बनेगा। उन्होंने कहा कि काईट फेस्टिवल ने एक बार फिर यह संदेश दिया है कि राजस्थान केवल देखने की जगह नहीं, बल्कि दिन से रात तक जीने और महसूस करने वाला एक अद्भुत अनुभव है। जहां दिन में आसमान पतंगों से संवाद करता है और रात में ऐतिहासिक धरोहरें आतिशी रौशनी में नहाकर उत्सव की साक्षी बनती हैं।
उल्लेखनीय है कि काईट फेस्टिवल वर्षों से शहरवासियों, देशी पर्यटकों और विदेशी सैलानियों के बीच अत्यंत लोकप्रिय है। हर वर्ष बड़ी संख्या में पर्यटक इस उत्सव के माध्यम से राजस्थान की जीवंत संस्कृति, लोक कला और आतिथ्य परंपरा का अनुभव करते हैं।
