जयपुर। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा 01 अगस्त, 2024 को सिविल अपील संख्या 2317/2011 पंजाब राज्य बनाम दविंद्र सिंह में दिए गए निर्णय में आरक्षण के लिए अनुसूचित जातियों व अनुसूचित जनजातियों का उप-वर्गीकरण करने का निर्णय दिया है तथा इन वर्गों के आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू करने व एक पीढ़ी को आरक्षण का लाभ मिल जाए तो दूसरी पीढ़ी को आरक्षण का लाभ नहीं देने की बातें कही गई हैं। ऑल इंडिया एससीध्एसटी रेलवे एम्प्लॉयज एसोसिएशन ने दिनांक 28 अगस्त 2024 को समस्त जोनल रेलवे मुख्यालय व उत्पादन इकाइयों पर अखिल भारतीय विरोध प्रदर्शन कर महाप्रबंधक¨ं के माध्यम से माननीय प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन दिया है. इस कड़ी में एसोसिएशन ने उत्तर पश्चिम रेलवे मुख्यालय, जयपुर पर विरोध प्रदर्शन किया जिसमें सभी मंडल, कारखाना व इकाइयों के हजारों लोगो ने भाग लिया व् माननीय सर्वोच्च न्यायलय के निर्णय का विरोध किया।
एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी एल बैरवा ने कहा कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय का उक्त निर्णय संविधान के अनुच्छेद 341, 342 एवं 16(4) के विरुद्ध है तथा हायर बेंच के निर्णयों के खिलाफ है। इस निर्णय से अपने राजनैतिक फायदे के लिए अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग को जातियों व उपजातियों में बाँटने का काम होगा तथा इन वर्गों की एकता का विभाजन होगा जिसे बाबा साहेब डॉ. अम्बेडकर ने लम्बे संघर्ष के बाद स्थापित किया था। पहले ही निर्धारित प्रतिशत आरक्षण नहीं मिल पा रहा है, सरकारी सेवाओं का निजीकरण हो रहा है। जातिगत जनगणना नहीं करवा रहे जिससे असली स्थिति सामने आ जाती, पिछली जनगणना के अनुसार अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग का आरक्षण दो-दो प्रतिशत बढ़ता है उसे नहीं बढ़ा रहे हैं। निजी क्षेत्र में आरक्षण नहीं दे रहे, इण्डियन जुडिसियल सर्विस का गठन नहीं कर रहे। ईडब्ल्यूएस को आरक्षण का प्रावधान तत्काल हो गया और पदोन्नति में आरक्षण के केस में आँकड़ों की गणना करके सुप्रीम कोर्ट में पेश नहीं कर रहे व पदोन्नति में आरक्षण खतरे में हैं। अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग को अपनी स्वयं की वरिष्ठता व योग्यता से सामान्य पद पर पदोन्नति न देकर रिजर्वेशन का रिवर्स डिस्क्रिमिनेशन भोगना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग में क्रीमी लेयर के बारे में स्थिति स्पष्ट की है लेकिन इन वर्गों में उप-वर्गीकरण के बारे में स्पष्ट नहीं किया है जिससे पूरे देश के अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग में भारी रोष व्याप्त है।
एसोसिएशन के जोनल अध्यक्ष टी आर मीणा ने कहा कि अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग का उप-वर्गीकरण इन वर्गों की एकता को बाँटने वाली कार्यवाही है जिसे हम होने नहीं देंगे। जोनल अतिरिक्त सचिव श्री राम सिंह ने उक्त निर्णय की निंदा करते हुए इसे संविधान विरोधी बताया व् सरकार से जल्दी से जल्दी रिव्यु पिटीशन फाइल करने की मांग की। विरोध प्रदर्शन के अंत में उत्तर पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक श्री अमिताभ के माध्यम से माननीय प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन दिया जिसमें निम्नलिखित मांग की हैंः-
- माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय दिनांक 01 अगस्त, 2024 के खिलाफ रिव्यु पिटीशन दायर की जाये व इसे निष्प्रभावी करने के लिए तत्काल अध्यादेश लाया जाये व संविधान संशोधन विधेयक पारित किया जाये।
- माननीय न्यायालयों के माध्यम से अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग के आरक्षण को समाप्त करने का लगातार प्रयास होता रहा है अतः आरक्षण कानून बनाकर इसे संविधान की 9वीं अनुसूची में जोड़ा जाये।
- वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग का दो-दो प्रतिशत आरक्षण बढ़ाया जाये तथा जातिगत जनगणना करके इन वर्गों का आबादी के अनुसार आरक्षण का प्रावधान किया जाये।
- अभी भी ग्रुप ए की उच्चतर सेवाओं, एक्स-कैडर पदों, लेटरल एंट्री व संविदा से भरे जाने वाले पदों सहित अनेकों जगह आरक्षण नहीं है अतः सभी जगह आरक्षण व्यवस्था लागू की जाये।
- सरकारी सेवाओं का तेज गति से निजीकरण हो रहा है तथा निजी क्षेत्र में आरक्षण नहीं है जिससे अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग के सरकारी नौकरी के अवसर घट रहे हैं अतः निजी क्षेत्र में आरक्षण का प्रावधान किया जाये।
- सरकारी विभागों में संविदा, पार्ट टाइम, ठेका पद्धति, आउटसोर्स व एजेंसी के माध्यम से अस्थाई रूप से रखे जाने वाले कार्मिकों की भर्ती में आरक्षण व्यवस्था लागू की जाये।
- माननीय सर्वोच्च न्यायालय व उच्च न्यायालयों में कॉलेजियम सिस्टम तत्काल समाप्त कर इंडियन जुडिशल सर्विसेज का गठन कर जुडिशरी में आरक्षण का प्रावधान किया जाये।
- माननीय सर्वोच्च न्यायालय की 9 जजों की बेंच के निर्णय के अनुसार अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग में क्रीमी लेयर लागू नहीं है फिर भी इन वर्गों के आरक्षण में क्रीमी लेयर लागू करने व एक पीढ़ी को लाभ मिल जाये तो दूसरी पीढ़ी को लाभ न देने का सुझाव न्याय संगत नहीं है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय व उच्च न्यायालयों में एक ही परिवार की अनेकों पीढ़ियां कॉलेजियम सिस्टम से जज बने हैं अतः उन पर इसे लागू किया जाये।
- एक तरफ अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग में उप-वर्गीकरण की बात की जा रही है दूसरी तरफ इन वर्गों को म्ॅै में आरक्षण लाभ लेने से वंचित किया जा रहा है। अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग को म्ॅै में आरक्षण लाभ दिया जाये तथा अपनी योग्यता से सामान्य पद पर नियुक्त होने के लिए पात्र होते हैं तो उन्हें न रोका जाये।
- अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग के लिए आरक्षण महात्मा गाँधी व बाबा साहेब डॉ.अम्बेडकर के बीच हुए पूना पैक्ट के तहत कम्युनल अवार्ड जिसमें इन वर्गों के लिए पृथक निर्वाचक मंडल का प्रावधान था के बदले में दिया गया था अतः अब यदि आरक्षण के साथ छेड़ छाड़ की जाती है तो हमें पृथक निर्वाचक मंडल दिया जाये।
- विभिन्न क्षेत्रों में जाति विशेष को पीढ़ी दर पीढ़ी आरक्षण दिया हुआ है जैसे मंदिर का पुजारी एक ही जाति व एक ही परिवार से पीढ़ी दर पीढ़ी पुजारी बना रहता है जिसकी समीक्षा कर इसमें आरक्षण व्यवस्था लागू कर सभी जातियों के लोगो को इसमें प्रतिनिधित्व दिया जाये।
- अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग के जिन लोगो को अभी तक आरक्षण का लाभ नहीं मिल पाया है उन्हें फ्री भोजन, आवास, शिक्षा, स्वास्थ, कोचिंग आदि की व्यवस्था कर उन्हें आगे लाने का कार्य किया जाये। उन्हें अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग के आरक्षण के अलावा अलग से आरक्षण दिया जाये जैसे म्ॅै को व राजस्थान में डठब् को अलग से आरक्षण दिया है।
