राज मीडिया टाइम्स ख़ास रिपोर्ट
जयपुर। जयपुर रेलवे स्टेशन, जो कभी स्वच्छता में अग्रणी था, वर्तमान में अपने प्रवेश मार्गों पर कचरे और दुर्गंध की समस्या से जूझ रहा है। यह स्थिति न केवल शहर की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाती है, बल्कि पर्यटकों और आगंतुकों के लिए भी असुविधाजनक है। 2019 में, जयपुर रेलवे स्टेशन को स्वच्छता सर्वेक्षण में देश का सबसे स्वच्छ स्टेशन घोषित किया गया था।

शहर के प्रमुख पर्यटन स्थल होने के नाते, जयपुर में प्रतिदिन हजारों पर्यटक आते हैं। कचरे और गंदगी से भरे प्रवेश मार्ग न केवल शहर की छवि को धूमिल करते हैं, बल्कि पर्यटन उद्योग पर भी नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। स्थानीय प्रशासन और नगर निगम की उदासीनता इस समस्या को और बढ़ा रही है।

जयपुर रेलवे जंक्शन से बाहर निकलते ही मेट्रो ब्रिज के नीचे स्थित केसर भवन के सामने कचरे का ढेर लगा हुआ है। न केवल आसपास के दुकानदार और ढाबा संचालक यहाँ कचरा डालते हैं, बल्कि नगर निगम की कचरा गाड़ी भी इसी स्थान पर कचरा खाली करती है। जयपुर में प्रवेश करने के इस मुख्य मार्ग पर प्रशासन की गैर-जिम्मेदाराना हरकत शहर की छवि को धूमिल कर रही है।
हाल ही में, भारतीय रेलवे ने स्वच्छता पखवाड़ा के दौरान 45.20 करोड़ वर्ग मीटर क्षेत्र में सफाई अभियान चलाया लेकिन जयपुर रेलवे स्टेशन के प्रवेश मार्गों की स्थिति में सुधार नहीं हुआ है। मुख्यमंत्री से आग्रह है कि वे इस गंभीर मुद्दे पर तत्काल ध्यान दें और संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी करें ताकि जयपुर की स्वच्छता और प्रतिष्ठा को पुनः स्थापित किया जा सके। जनता की अपेक्षा है कि प्रशासनिक तंत्र सक्रिय होकर इस समस्या का समाधान करेगा, जिससे आगंतुकों को एक स्वच्छ और सुंदर शहर का अनुभव हो सके।
