संपादक नवल किशोर शर्मा “महर्षि गर्गाचार्य सम्मान 2025” से सम्मानित
जयपुर। श्रीकृष्ण–बलराम के कुलगुरु एवं ज्योतिष के प्रधान आचार्य महर्षि गर्गाचार्य जी के जन्मोत्सव सप्ताह के अंतर्गत 31 अगस्त रविवार को ब्रह्मपुरी स्थित अखाड़ा वाले हनुमान जी मंदिर परिसर में कृष्ण गौड़ ब्राह्मण सेवा समिति के तत्वावधान में महारुद्राभिषेक, ज्योतिष परिचर्चा एवं विद्वतजन सम्मान समारोह का भव्य आयोजन हुआ।

कार्यक्रम की शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार के बीच गौरी-गणेश, महर्षि गर्गाचार्य, सप्त ऋषि एवं भगवान परशुराम, माँ गायत्री, भगवान शिव के पूजन से हुई। अनुष्ठान युवाचार्य पंडित रोहित शास्त्री एवं अभिनव शर्मा के सान्निध्य में संपन्न हुए। इस अवसर पर गर्ग संहिता का पूजन कर आशीर्वाद लिया गया।

समारोह में राजस्थान ब्राह्मण महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं संपादक नवल किशोर शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्हें समाज के सर्वोच्च सम्मान “महर्षि गर्गाचार्य सम्मान 2025” से अलंकृत किया गया। अपने उद्बोधन में उन्होंने कहा कि समाज की उन्नति के लिए युवाओं को सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए तथा सामाजिक एकता व सांस्कृतिक संरक्षण की दिशा में ठोस प्रयास करने होंगे। इस दौरान समाज के युवाचार्यो व नवयुवकों को आयोजन में भागीदारी देने पर अतिथियों द्वारा स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।

समिति के उपाध्यक्ष पंडित बनवारी लाल शर्मा ने संगठनात्मक गतिविधियों की जानकारी दी, जबकि महासचिव घनश्याम शर्मा ने धार्मिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों में समाजबंधुओं के सहयोग की सराहना की। पंडित मोहन लाल शर्मा ने महर्षि गर्गाचार्य के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि झालावाड़ जिले में गागरोन से गंगधार क्षेत्र तक का भूभाग प्राचीन काल में ‘गर्गारणय’ के नाम से प्रसिद्ध था, जो उनकी तपोस्थली माना जाता है। उन्होंने कहा कि महर्षि गर्गाचार्य ने सनातन संस्कृति को जीवंत बनाए रखने में अतुलनीय योगदान दिया।

अध्यक्ष पंडित विनोद शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कि महर्षि गर्गाचार्य ने यदुवंश के कुलगुरु रहते हुए भगवान श्रीकृष्ण व बलराम का नामकरण संस्कार संपन्न किया। साथ ही उन्होंने शिव–पार्वती विवाह का संपादन एवं ज्योतिष के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान देकर त्रिकालदर्शी आचार्य की प्रतिष्ठा प्राप्त की। महर्षि गर्गाचार्य जी के ज्योतिष, खगोल व वैदिक ज्ञान से प्रभावित होकर अनेको राजवंश द्वारा उन्हें राजगुरु के पद पर सुशोभित किया गया।

महिला मण्डल की प्रतिनिधि वर्षा शर्मा ने विदुषी गार्गी के जीवन और शास्त्र ज्ञान पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उनके नाम से आज भी सरकार द्वारा ‘‘गार्गी पुरस्कार’’ प्रदान किया जाता है, जो नारी शिक्षा और विद्वत्ता का प्रतीक है।
आयोजन को सफल बनाने में विनोद शर्मा माधोराजपूरा, पंडित चंद्रप्रकाश शर्मा रेनवाल, पंडित नवरत्न शर्मा, अजय आशीष, दीपक, कनिष्क, चिराग, तुषार, अल्पेश, सुदर्शन, शुभम, पवन आदि पदाधिकारीगण व नवयुवकों के साथ-साथ पं सीताराम, राधेश्याम, तनसूख, तीर्थनारायण, ओमप्रकाश, ज्ञानप्रकाश जी आदि वरिष्ठजन व गार्गी विप्र महिला मंच से मातृ शक्ति का सहयोग प्राप्त हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में गणमान्य विप्रबंधु, महिला शक्ति व नवयुवक शामिल हुए। पूरे कार्यक्रम के दौरान भगवान परशुराम व महर्षि गर्गाचार्य के जयकारों से वातावरण गुंजायमान रहा। अंत में प्रसादी वितरण के साथ समारोह का समापन हुआ।
