पुलिस के जवान खड़े है सीना तान, इनसे महफूज है हमारा राजस्थान
आजादी से पहले रियासत कालीन दौर में भी पुलिस प्रशासन आज की तरह बहुत सुद्धड़ था। वर्ष 1949 में 16 अप्रेल को राजस्थान पुलिस का गठन होने के बाद से अब तक पुलिस के जवानों की सेवा और जज्बे से ही राजस्थान सुरक्षित है ।
30 मार्च 1949 को रियासतों का एकीकरण होने के बाद 7 अप्रेल 1949 को आर. बनर्जी राजस्थान पुलिस के प्रथम पुलिस महानिरीक्षक बने । सात माह तक आईजीपी रहे बनर्जी ने पुलिस का सामान्य कोड तैयार किया। राजस्थान पुलिस के वास्तविक संस्थापक जोधपुर के महानिरीक्षक शमशेर सिंह थे। 30 मार्च 1949 को प्रधान मंत्री जवाहर लाल नेहरु ने पुलिस ध्वज प्रदान किया। पुलिस का आदर्श वाक्य ” सेवार्थ कटिबद्धता ” है।
इससे पहले सन् 1925 में एक जयपुर रियासत में आईजीपी और आठ पुलिस अधीक्षक एवं 86 सब इस्पेक्टर और 2176 सिपाही थे। सन् 1932 में पुलिस ट्रेनिंग स्कूल की स्थापना की गई। जयपुर रियासत की पुलिस में गुप्तचर का जाल बिछा रहता था । विश्व युद्ध के बाद अंग्रेजों की खिलाफत बढ़ने लगी तब उन्होंने पुलिस का ढर्रा बदला और फौजदारी और खबर विभाग को मजबूत किया । सन 1922 में एफ सी कॉवेट्री पहले आईजीपी और नारायण सिंह कानोता को विशेष पुलिस अधिकारी और नियाज अहमद को जयपुर का एसपी लगाया । 1931 में सी बी ग्लांसी कॉक आईजीपी बने। इसके बाद सख्त मिजाज के एफ एस यंग आईजीपी बनकर आए । जयपुर रियासत के अतिरिक्त आईजीपी लाला दीवानचंद बजाज ने जयपुर रियासत की पुलिस दंड संहिता के नियम बनाए ।
जब बीसी टायलर आईजीपी बने तब काशी प्रसाद तिवारी व राय साहब करतार नाथ डीआईजी बने । विजय आनंद के आईजीपी बनने के समय पुलिस प्रशासन का खाका बदल कर जयपुर पुलिस सहित सभी निजामतों में अस्सी थाने खोले गए।
उन दिनों डाकुओं का बड़ा खोफ रहता था। एसपी मूल सिंह महरोली व किशोर सिंह खाचरियावास ने धोलपुर व आगरा के खोफनाक डाकुओं को जिंदा पकड़ा । इनके अलावा गोकुल नारायण व्यास, पं हनुमान सहाय, हकीकत राय, एहतारामुमुद्दीन , पांचू लाल बनर्जी व बृजनाथ जयपुर शहर के नामी पुलिस अधिकारी रहे।
-सवाई राम सिंह के शासन में एसपी वाहिदुद्दीन कोतवाल और सैयद जहीरूद्दीन हुसैन
“तब और आज की पुलिस का इतिहास”- जितेन्द्र सिंह शेखावत
