कथा के उपरान्त महाराज श्री ने राज मीडिया टाइम्स ओर ब्राह्मण संदेश नववर्ष कैलेंडर 2026 का विमोचन किया
जयपुर। गिर्राज संघ परिवार विश्वकर्मा जयपुर के तत्वावधान में विद्याधर नगर, अग्रसेन अस्पताल, सेक्टर 7, जयपुर में 9 जनवरी से श्रीमद्भागवत कथा का विशाल आयोजन चल रहा है।
कथा व्यास आचार्य श्री मृदुल कृष्ण गोस्वामी जी महाराज ने द्वितीय दिवस की कथा में श्री शालिग्राम जी की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि जिस घर में श्री शालिग्राम जी का विग्रह विद्यमान है, वह घर एक किलोमीटर की परिधि में तीर्थस्थल बन जाता है। अत: हमें श्री शालिग्राम जी की सेवा अवश्य ही करना चाहिए।

महाराज श्री ने आज की युवा पीढ़ी को माता पिता की सेवा और देशभक्ति का संदेश दिया । उन्होंने कहा कि देवी मां के मंदिर में मातारानी को चुनरी चढ़ाने के साथ साथ ही अपनी मां और अपने पिता की सदैव सेवा और सम्मान करें । जिस पुत्र के माता पिता सुखी और प्रसन्न रहते हैं और उनका सम्मान किया जाता है, उसे प्रभु की कृपा प्राप्त होती है। वह व्यक्ति जीवन में निरंतर प्रगति के नये नये सोपान तय करता है।
माता-पिता का भी यह कर्तव्य है कि बच्चों को देशप्रेम और देशभक्ति की शिक्षा दें। जिस मातृभूमि में हमने जन्म लिया है उसके प्रति भी हमारे कुछ कर्तव्य हैं । उनका पालन अवश्य करें।

श्रीमद्भागवत महापुराण का महत्व बताते हुए महाराज श्री ने कहा कि यह कलिकाल के समस्त पापों का समूल नाश करती है। श्रीमद्भागवत में सभी प्रश्नों, शंकाओं का समाधान विद्यमान है। कथा के श्रृवण से भक्ति, शक्ति और मुक्ति प्राप्त होती है। जहां भी श्रीमद् भागवत की कथा होती है वहां भगवान अवश्य उपस्थित होकर अपनी कथा का श्रृवण करते हैं। जो भक्त लज्जा त्याग कर संसार की परवाह न करते हुए मेरे लिए अश्रु बहाता है व नृत्य करता है वह अपने साथ साथ ही संपूर्ण संसार को भी पवित्र कर देता है।

श्रीमद्भागवत में कहा गया है कि सदैव सत्य का ध्यान करें व सत्य का पालन करें। महाराज श्री ने कहा कि सनातन धर्म भी सदा सत्य है। सनातन धर्म के अंतर्गत सत्य आचरण, अहिंसा न करना, प्रभु सेवा, अच्छे आचरण आदि बातों पर बहुत जोर दिया है। कथा के उपरान्त महाराज श्री ने राज मीडिया टाइम्स ओर ब्राह्मण संदेश नववर्ष कैलेंडर 2026(पंचांग) का विमोचन किया। महाराज श्री ने कहा कि कैलेंडर में दी गई धार्मिक जानकारियों आम आदमी के लिए उपयोगी होगी। उन्होंने कैलेंडर के लेआउट और प्रिंटिंग की भी सराहना की। इस अवसर पर संपादक नवल किशोर शर्मा को महाराज श्री ने प्रसाद देकर विशेष आशीर्वाद दिया। महाराज श्री के श्रीमुख से कथा रस और मधुर भजनों को सुनकर श्रोतागण झूम उठे और मंत्रमुग्ध होकर नृत्य करने लगे।
