जयपुर। बिरला ऑडिटोरियम में रामायण पर आधारित नाटक ‘हमारे राम’ का मंचन 20 और 21 जुलाई 2024 को किया गया। नाटक का निर्देशन गौरव भारद्वाज कर रहे हैं। इस नाटक में बॉलीवुड और थिएटर के मंजे हुए कलाकारों ने अपने अभिनय के जरिए छाप छोड़ी है। नाटक में दमदार संवाद, लाइट और म्यूजिक तीन घंटे तक दर्शकों को बांधे रखते हैं। ‘हमारे राम’ नाटक का अब तक देश के 60 से ज्यादा विभिन्न शहरों में मंचन हो चुका है।

‘हमारे राम’ नाटक की शुरुआत हम अंत से करते हैं। रावण युद्ध में पराजित है। लक्ष्मण श्रीराम को इस विजय की बधाई देते हैं, किंतु राम प्रसन्न होने के बजाय लक्ष्मण को एक अच्छे शिष्य की भांति रावण से ज्ञान अर्जित करने को कहते हैं। लक्ष्मण रावण को प्रणाम करके अपना परिचय देते हैं। रावण लक्ष्मण से कहते हैं, “तुम एक सच्चे शिष्य की भांति आए हो, इसलिए मैं जीवन का ज्ञान अवश्य दूंगा। अहंकार… चाहे सत्ता का हो या सौंदर्य का, भक्ति का हो या शक्ति का, धन का हो या धर्म का। बड़े से बड़े विश्व विजेता का विनाश कर देता है। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण हूँ मैं खुद ‘रावण’। अहंकार में तीनों गए – कुल, गौरव और वंश। न मानो तो देख लो इस रावण का अंत। रावण को अपने ज्ञान का अहंकार था और राम को अहंकार का ज्ञान था। जीवन में सफल होने के लिए शत्रु-दृष्टि और मित्र-दृष्टि का भेद होना अनिवार्य है। ये जरूरी नहीं कि जो हमारे साथ हैं वे मित्र हैं और जो दूर हैं वे शत्रु। रोग सदैव हमारे शरीर में हमारे साथ होता है, किंतु भय हमारा शत्रु होता है।”

रावण के नाम पर हमेशा क्रोधित रहने वाले लक्ष्मण ही नहीं, ऑडिटोरियम में बैठी ऑडियंस भी रावण की यह बातें सुनकर एक बार के लिए नतमस्तक हो गई। नाटक की खूबसूरती इसका सेट डिजाइन था, जिसे ग्राउंड स्टाफ पलक झपकते ही महल से कुटिया और जंगल से महल में बदल देता था। दो बड़े ट्रक में यह सेट दिल्ली से जयपुर लाया गया।

नाटक में राहुल आर भूचर ने राम, भानु प्रताप ने लक्ष्मण, हरलीन रेखी ने सीता, दिया ने रंभा, और दानिश अख्तर ने हनुमान की भूमिका निभाई। रावण की भूमिका में बॉलीवुड अभिनेता आशुतोष राणा रहे। गौरतलब है कि इस रामायण को लव-कुश के नजरिए से दिखाने का प्रयास हुआ है। नाटक के उपरांत संपादक नवल किशोर शर्मा ने नाटक के प्रमुख कलाकारों से विशेष मुलाकात की और सभी के अभिनय की प्रशंसा की।


