जयपुर। इम्पीरियल चैम्बर द्वारा “कब्रिस्तान और ज़मीन का संकट: क्या भारत में भविष्य के टकराव की नींव रख सकता है?” विषय को दिनांक 12 जनवरी 2026 को सरकार के समक्ष उठाया गया था। राज्यसभा में महाराष्ट्र के माननीय सांसद डॉ. अजीत गोपछड़े जी ने इस विषय को प्रमुखता से आज राज्यसभा में शून्य काल में रखते हुए देश में तेजी से बढ़ते शहरीकरण और सीमित भूमि संसाधनों के बीच इस मुद्दे की गंभीरता को उजागर किया। उन्होंने अपने वक्तव्य में स्पष्ट कहा कि वर्तमान समय में भूमि एक अत्यंत बहुमूल्य संसाधन बन चुकी है और इसके दीर्घकालिक एवं व्यवस्थित उपयोग के लिए ठोस नीति बनाना आवश्यक है।
उन्होंने सुझाव दिया कि देश के सभी श्मशान घाटों और कब्रिस्तानों की जियोग्राफिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम आधारित डिजिटल मैपिंग अनिवार्य की जाए, जिससे इन स्थलों का सटीक और अद्यतन रिकॉर्ड उपलब्ध हो सके। साथ ही जहाँ पुराने रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति में अंतर है, वहाँ लैंड ऑडिट कर भूमि अभिलेखों को दुरुस्त करने की आवश्यकता बताई।
अपने वक्तव्य में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय उदाहरणों का भी उल्लेख किया, जहाँ जापान और यूरोपीय देशों में ‘वर्टिकल क्रिमेट्रीज़’ और पर्यावरण अनुकूल अंतिम संस्कार प्रणालियाँ अपनाई जा रही हैं। इसी प्रकार अन्य देशों में सरल और व्यवस्थित व्यवस्थाएँ भी लागू हैं, जिन्हें भारत में भी अपनाने पर विचार किया जा सकता है।
इम्पीरियल चैम्बर ने विभिन्न माध्यमों से इसके लिए सुझाव दिए गए थे। संसद में इस विषय के उठने से यह स्पष्ट है कि चैंबर द्वारा उठाए गए मुद्दे अब नीति-निर्माण के केंद्र में आ रहे हैं। यह विषय किसी एक धर्म या समुदाय से जुड़ा नहीं है, बल्कि देश के बहुमूल्य संसाधनों के संतुलित और जिम्मेदार उपयोग से संबंधित है। सभी परंपराओं का सम्मान करते हुए भविष्य की पीढ़ियों के लिए भूमि एवं पर्यावरण का संरक्षण आवश्यक है।
अंत में, सरकार से आग्रह किया गया कि इस विषय की गंभीरता को देखते हुए एक समग्र “नेशनल पॉलिसी फॉर फ्यूनरल लैंड मैनेजमेंट” तैयार की जाए, जिससे आने वाले समय में भूमि उपयोग से जुड़े विवादों से बचा जा सके और एक व्यवस्थित प्रणाली विकसित हो सके।
इम्पीरियल चैम्बर की पहल पर संसद में मंथन: राज्यसभा में डॉ. अजीत गोपछड़े की जोरदार पैरवी – भूमि संकट के बीच अंतिम संस्कार स्थलों पर राष्ट्रीय नीति की मांग तेज
