जयपुर ( विशेष संवाददाता)। राजस्थान की असली पहचान यहाँ के गाँवों की गलियों और ढाणियों में बसने वाली लोक कलाओं में है, जो समय के साथ कहीं खोती जा रही हैं। इसी लुप्त होती विरासत को सहेजने और उसे वैश्विक पहचान दिलाने के लिए जयपुर में आगामी 28 मार्च 2026 को “Rangrez Rajasthan – The Royal Cultural Night” का भव्य आयोजन होने जा रहा है।
आलिया महेश्वरी द्वारा आयोजित यह शो केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उन गुमनाम कलाकारों के लिए एक ‘संजीवनी’ साबित होगा जो अपनी कला को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
📍 लुप्त होती कलाओं का पुनरुद्धार
इस आयोजन की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यहाँ उन लोक कलाकारों को मंच दिया जाएगा, जिनकी कला अब लुप्त होने की कगार पर है। आयोजकों का संकल्प है कि राजस्थान की उन पारंपरिक कलाओं को, जो अब केवल इतिहास के पन्नों तक सीमित रह गई हैं, फिर से आम जनता और पर्यटकों के सामने जीवंत किया जाए।
👗 पहनावे का शाही प्रदर्शन (Royal Attire Showcase)
‘रंगरेज़ राजस्थान’ में मरुधरा के पारंपरिक पहनावे को एक विशेष शो के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा। साफे की आन, घाघरे की ओट और राजस्थानी गहनों की चमक जब मंच पर बिखरेगी, तो राजस्थान का ‘रॉयल’ कल्चर पूरी दुनिया देखेगी। यह शो यह संदेश देगा कि हमारा पहनावा ही हमारी सबसे बड़ी सांस्कृतिक विरासत है।
🌍 राजस्थान के कल्चर को वैश्विक बढ़ावा
आयोजन का मूल मंत्र “विरासत का संरक्षण और पर्यटन का संवर्धन” है। कार्यक्रम के माध्यम से:
कलाकारों को मंच: छोटे गाँवों के प्रतिभाशाली कलाकारों को बड़े मंच पर अपनी कला दिखाने का मौका मिलेगा।
संस्कृति का प्रचार: देश-विदेश से आने वाले मेहमान राजस्थान की विविधता से रूबरू होंगे।
रोजगार के अवसर: लोक कला और पहनावे को बढ़ावा मिलने से स्थानीय कारीगरों और कलाकारों को नई पहचान और काम मिलेगा।
🎙️ आयोजकों का संदेश
आलिया महेश्वरी के अनुसार:
“राजस्थान की माटी का हर रंग अनमोल है। हम उन कलाकारों को वापस मुख्यधारा में लाना चाहते हैं जो अपनी कला को भुला चुके हैं या जिन्हें मंच नहीं मिल पा रहा। ‘रंगरेज़ राजस्थान’ हमारी संस्कृति को आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने का एक ईमानदार प्रयास है।”
विलुप्त होती राजस्थानी लोक कलाओं को मिलेगा नया जीवन, ‘रंगरेज़ राजस्थान’ बनेगा कलाकारों का बड़ा मंच
