जयपुर। राजस्थान की ग्रामीण महिलाओं ने आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक नई और प्रेरणादायक पहचान बनाई है। राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (राजीविका) से जुड़कर संतोष कुमारी, गायत्री ननोमा, सरिता कंवर और पार्वती मईडा जैसी महिलाओं ने सीमित संसाधनों और आर्थिक चुनौतियों को पीछे छोड़ते हुए ‘लखपति दीदी’ के रूप में अपनी सशक्त मौजूदगी दर्ज कराई है।
झालावाड़ जिले की संतोष कुमारी ने कपड़ा व्यापार, पशुपालन और समूह प्रबंधन के माध्यम से वार्षिक 10.40 लाख रुपये की आय अर्जित कर आत्मनिर्भरता की मजबूत नींव रखी है। डूंगरपुर जिले की गायत्री ननोमा कृषि एवं पशुपालन गतिविधियों से लगभग 5.71 लाख रुपये की वार्षिक आय प्राप्त कर रही हैं। वहीं राजसमंद जिले की सरिता कंवर ने सिलाई, डेयरी और घरेलू उत्पादों के व्यवसाय से 10 लाख रुपये से अधिक की वार्षिक आय हासिल कर ग्रामीण महिला उद्यमिता की नई कहानी लिखी है। बांसवाड़ा जिले की पार्वती मईडा ने स्वयं सहायता समूह से ऋण लेकर व्यापार प्रारंभ किया और आज अपनी आर्थिक स्थिति को सुदृढ़ बना चुकी हैं।
इन महिलाओं की सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि इन्होंने अपने परिवारों को आर्थिक सुरक्षा देने के साथ-साथ गांव की अन्य महिलाओं को भी रोजगार, मार्गदर्शन और आत्मविश्वास प्रदान किया है। सामूहिक प्रयास, प्रशिक्षण और निरंतर परिश्रम के बल पर इन्होंने स्थायी आजीविका के साधन विकसित किए हैं।
इनकी उल्लेखनीय उपलब्धियों के सम्मान स्वरूप जिले की लखपति दीदियां 77वीं गणतंत्र दिवस परेड में दिल्ली के कर्तव्य पथ पर सहभागिता करेंगी। यह उपलब्धि न केवल राजस्थान बल्कि पूरे देश के लिए नारी शक्ति, महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर भारत की सशक्त तस्वीर प्रस्तुत करती है।
राजस्थान की ‘लखपति दीदियां’— ग्रामीण नारी शक्ति की आत्मनिर्भरता की मिसाल
