जयपुर। राजस्थान के कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीना ने मंगलवार को नई दिल्ली में भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेन्द्र यादव से शिष्टाचार भेंट की।
इस अवसर पर दोनों मंत्रियों के बीच प्रदूषण नियंत्रण, कृषि क्षेत्र में उपचारित जल (ट्रीटेड वॉटर) के उपयोग तथा अंतर–मंत्रालयी समन्वय को और अधिक मजबूत बनाने को लेकर विस्तृत चर्चा हुई।
बैठक के उपरांत पर्यावरण मंत्रालय के सचिव तन्मय कुमार की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय प्रशासनिक बैठक आयोजित की गई, जिसमें केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष विक्रम सिंह तथा मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव नरेश पाल गंगवार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
इस बैठक में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए यह तय किया गया कि देश की लिक्विड डिस्चार्ज पॉलिसी के अंतर्गत 65 प्रतिशत उपचारित जल का उपयोग सिंचाई के लिए अनिवार्य रूप से किया जाएगा। यह दिशा-निर्देश नीति का अभिन्न अंग बनाया जाएगा, जिससे कृषि क्षेत्र को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा और जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति होगी।
यह निर्णय पर्यावरणीय सुरक्षा को सुदृढ़ करने तथा किसानों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह कदम पर्यावरण और कृषि के समन्वय को नई दिशा देने वाला ऐतिहासिक निर्णय सिद्ध होगा
पर्यावरण और कृषि समन्वय को लेकर हुआ ऐतिहासिक निर्णय
