जयपुर। जवाहर कला केन्द्र व इन्दिरा गांधी पंचायती राज संस्थान, जयपुर में लग रहा सरस राज सखी राष्ट्रीय मेला इन दिनों खूब प्रसिद्धि हासिल कर रहा है। यह मेला राजीविका दीदीयों द्वारा निर्मित शिल्पकला, एम्ब्रायड्री, जैविक उत्पाद, घर का साज-सामान एवं खाने पीने से सम्बन्धित उत्पादों को एक स्थान पर खरीददारी करने का अवसर प्रदान कर रहा है।
सरस मेले में राजस्थान, गुजरात, उत्तर-प्रदेश, मध्य-प्रदेश, छत्तीसगढ, गोआ, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, केरल, तेलंगाना, आसाम आदि राज्यों की महिलाओं ने अपने उत्पादों की स्टॉल लगा रखी है। मेले में देश की लखपति दीदीयां अपने हाथों से निर्मित शोपीस आईटम बेच रही है। मेले में 250 से अधिक जीआई टैग उत्पादों की करीब 400 स्टॉल लगी हुई है।
लोगो द्वारा मिलेट्स (मोटा अनाज) के बने प्रोडक्ट सहित विभिन्न राज्यों के उत्पाद भी खूब पसंद किये जा रहे है। मेले में जनता का काफी उत्साह नजर आ रहा है। लोग हाथों से बनी वस्तुऐं, सजावटी सामान, शुद्ध मसाले एवं मोटे अनाज से बनी खाद्य चीजों में काफी रूचि दिखा रहे है।
मोटे अनाज को प्राथमिकता देने के लिए यहां बाजरे, जौ आदि के बिस्किट, खिचडी, टोश व अन्य मोटे अनाज से बनाये गये लड्डू, मठडी आदि भी उपलब्ध कराये गये है, जिन्हें आगन्तुकों द्वारा काफी पसंद किया जा रहा है। सरस मेलों से ग्रामीण स्वयं सहायता समूह की महिलाऐं न केवल अपनी आजीविका के अवसर पैदा कर रही है, बल्कि नारी सशक्तिकरण का एक आदर्श उदाहरण भी प्रस्तुत कर रही है।
सरस मेला ग्रामीण विकास विभाग के तत्वाधान से राजीविका द्वारा लगवाया गया है। ऐसे मेलों का उद्देश्य न केवल भारत की सांस्कृृतिक धरोहर को प्रदर्शित करना है, बल्कि ग्रामीण शिल्पकारों, बुनकरों और कारीगरों के उत्पादों को एक मंच पर लाकर उन्हें समृृद्धि की ओर अग्रसित करने का अवसर प्रदान करना है। यह मेला ग्रामीण भारत की महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए एक अहम कदम हैै, जो केन्द्र सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान‘ और ‘वोकल फॉर लोकल‘ की थीम पर लगाया गया है।
सरस राजसखी मेला महिलाओं के शक्तिकरण का बेहतरीन प्लेटफार्म
