नई दिल्ली। टी20 विश्व कप 2024 तक भारतीय टीम के बल्लेबाज़ी कोच रहे विक्रम राठौड़, जिस बदलाव की ओर टीम आगे बढ़ रही है उसको लेकर अधिक चिंतित नहीं हैं, लेकिन वह चाहते हैं कि टीम प्रबंधन इसको अधिक नियंत्रित तरीक़े से संभाले।
भारत की अगली सीरीज़ श्रीलंका में होनी है, जहां पर उन्हें तीन टी20आई और तीन वनडे खेलने हैं और यह पक्का है कि पिछले महीने बारबेडोस में टी20 विश्व कप के फ़ाइनल में साउथ अफ़्रीका को हराने के बाद संन्यास ले चुके रोहित शर्मा, विराट कोहली और रवींद्र जाडेजा के नहीं होने से टी20 टीम नई होगी।
राठौड़ ने PTI से कहा, “रोहित और विराट की क़ाबिलियत के खिलाड़ियों को बदलना कभी आसान नहीं होगा। हाल ही में ज़िम्बाब्वे के ख़िलाफ़ हुई टी20आई सीरीज़ में हमें थोड़ी झलक मिली की भविष्य की टी20 टीम कैसी होगी। लेकिन उस प्वाइंट तक पहुंचने के लिए अभी भी हमारे पास टेस्ट और वनडे क्रिकेट में कुछ साल हैं।”
भारत ने शुभमन गिल की कप्तानी में यह सीरीज़ 4-1 से अपने नाम की और इस टीम में आख़िरी तीन मैचों तीन सदस्य संजू सैमसन, शिवम दुबे और यशस्वी जायसवाल विजेता टी20 विश्व कप टीम का हिस्सा थे। टीम की कोचिंग बतौर अंतरिम कोच वीवीएस लक्ष्मण ने की थी। अब श्रीलंकाई दौरे से राहुल द्रविड़ की जगह गौतम गंभीर कोच की भूमिका में रहने वाले हैं। उनके कोचिंग स्टाफ़ में बाक़ी सदस्यों के बारे में अभी कोई जानकारी नहीं हुई है।
राठौड़ ने कहा, “मैं बदलाव से चिंतित नहीं हूं। भारतीय क्रिकेट में बहुत गहराई है। कई ऐसे कौशल से भरे शानदार खिलाड़ी हैं जो सिस्टम से आ रहे हैं। हमें बस एक चीज़ पर ध्यान देने की ज़रूरत है कि यह बदलाव नियंत्रित तरीक़े से हो, धीरे-धीरे हो।”
राठौड़ को लगता है कि कई युवा खिलाड़ी आ रहे हैं, भारत के पास लड़के हैं लेकिन उनमें से अगले दशक के लिए तीनों प्रारूपों के खिलाड़ी निकालने होंगे।
उन्होंने कहा, “मैं उम्मीद कर रहा हूं तब तक शुभमन गिल, ऋषभ पंत, यशस्वी जायसवाल, ध्रुव जुरेल जो खुद को स्थापित करेंगे और बदलाव को आसान बनाएंगे। वनडे में भी हमारे पास श्रेयस अय्यर, केएल राहुल और हार्दिक पंड्या जैसे अनुभवी खिलाड़ी हैं जो जगह लेंगे।” “कई रोचक खिलाड़ी आए हैं लेकिन गिल और जायसवाल भारत के लिए लंबे समय तक तीनों प्रारूपों में खेलने के लिए तैयार हैं। वह आने वाले समय में भारतीय बल्लेबाज़ी की रीढ़ की हड्डी होने जा रहे हैं।”
पिछले दो सीज़न में जिन खिलाड़ियों ने सीढ़ी चढ़ी है उनमें से एक रिंकू सिंह हैं, जिन्होंने दो वनडे और 20 टी20आई खेले, लेकिन अभी भी राष्ट्रीय टीम में नियमित नहीं हो पाए हैं। वह छोटे प्रारूप में बेहतरीन फ़ीनिशर हैं, लेकिन प्रथम श्रेणी में भी उन्होंने 69 पारियों में 54.70 की औसत से रन बनाए हैं।
राठौड़ ने कहा, “जब मैंने उसको नेट्स में बल्लेबाज़ी करते देखा तो मुझे कोई तकनीक़ी कारण नहीं दिखा कि क्यों रिंकू सफल टेस्ट बल्लेबाज़ नहीं बन सकता। मैं समझता हूं कि उसने टी20 क्रिकेट में खुद को बतौर शानदार फ़ीनिशर उभारा है लेकिन अगर आप उसके प्रथम श्रेणी रिकॉर्ड को देखें तो औसत 50 से ऊपर है।” “वह बेहद शांत स्वभाव के भी धनी हैं। तो ये सभी कारक संकेत देते हैं कि अगर मौक़ा दिया जाए तो वह एक टेस्ट क्रिकेटर के रूप में विकसित हो सकते हैं।”
रिंकू सिंह ‘टेस्ट क्रिकेटर के तौर पर उभर सकते हैं- राठौड़
