नई दिल्ली। इस साल 9 अगस्त को देशभर में रक्षाबंधन खास संयोग के साथ मनेगा। भाई-बहन के प्रेम के प्रतीक का ये पर्व इस बार श्रवण नक्षत्र, सौभाग्य योग, करण, मकर राशि में चंद्रमा और पूर्णिमा तिथि में मनाया जाएगा। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, ऐसा योग 297 साल बाद बना है। उज्जैन के ज्योतिषाचार्य पंडित अमर डिब्बेवाला ने कहा- ग्रहों की वर्तमान स्थिति 1728 में बने दुर्लभ संयोग को दोहरा रही है। रक्षाबंधन पर 8 ग्रह उन्हीं राशियों में रहेंगे, जिनमें 1728 में थे। इनमें सूर्य कर्क, चंद्र मकर, मंगल कन्या, बुध कर्क, गुरू और शुक्र मिथुन, राहु कुंभ और केतु सिंह राशि में रहेंगे। ऐसे अद्भुत योग शताब्दियों में एक बार ही बनते हैं। जिससे इस बार का रक्षाबंधन और भी पुण्य फलदायी माना जा रहा है।
मध्य प्रदेश के उज्जैन नगरी में स्थित महाकालेश्वर मंदिर में भगवान महाकालेश्वर को भस्मारती में पुजारी परिवार के अमर पुजारी द्वारा सवा लाख लड्डूओ का भोग लगाया गया। पंचामृत और जल से स्नान कराने के बाद उनका भव्य श्रृंगार किया गया। बाबा महाकाल को रंगबिरंगी पगड़ी पहनाई गई। इसके बाद भगवान को भस्म अर्पित की गई। इसके बाद भगवान को पुजारी परिवार द्वारा रक्षाबंधन के पावन पर्व पर प्रथम राखी बांधी गई। पुजारी धर्मेंद्र शर्मा द्वारा भगवान महाकालेश्वर को भोग लगाकर आरती पूर्ण की गई।बाबा महाकाल को पहली राखी बांधने की परंपरा सदियों से चली आ रही है। यह राखी पुजारी परिवार की महिलाएं बांधती है।
आरती के पश्चात महाकाल को 1.25 लाख लड्डुओं का महाभोग अर्पित किया गया। लड्डुओं को 4 दिनों के अंदर 60 डिब्बे देशी घी, 40 क्विंटल बेसन, 40 क्विंटल शक्कर और 25 किलोग्राम सूखे मेवे से बनाया गया है। हलवाई ओम प्रकाश शर्मा ने बताया कि लगभग 100 लोगों ने मिलकर यह प्रसाद तैयार किया।
रक्षाबंधन पर्व आज, बाबा महाकाल को बांधी गई सबसे पहली राखी
