जयपुर: जवाहर कला केन्द्र की ओर से स्थापना दिवस समारोह के अंतर्गत 14 अप्रैल तक दो प्रदर्शनी आयोजित की गयी है। अलंकार दीर्घा में तस्वीरों के जरिए केन्द्र का सिंहावलोकन किया गया है वहीं एचिंग प्रिंट भी प्रदर्शित किए गए हैं। स्फटिक दीर्घा में केन्द्र के कला संग्रह को प्रदर्शित किया गया है।
अलंकार कला दीर्घा में 150 से अधिक फोटो एग्जीबिट की गयी हैं। तत्कालीन राष्ट्रपति पं. शंकर दयाल शर्मा की ओर से केन्द्र का उद्घाटन करने से आज तक का सफरनामा इन तस्वीरों के जरिए दर्शाया गया है। इन तस्वीरों में विभिन्न कला विधाओं के साथ—साथ अलग—अलग प्रदेशों की संस्कृति का सौंदर्य भी देखने को मिल रहा है। केन्द्र की ओर से आयोजित लोकरंग, बसंत पर्व, राजस्थान साहित्य उत्सव, वागेश्वरी समारोह समेत अन्य कार्यक्रमों की स्वर्णिम यादों को यहां संजोया गया है। केन्द्र और ड्राइंग एंड पेंटिंग डिपार्टमेंट, राजस्थान विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में 2 से 8 अप्रैल तक एचिंग प्रिंट वर्कशॉप का आयोजन किया गया था। वर्कशॉप में 90 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान प्रतिभागियों की ओर से तैयार 50 से अधिक प्रिंट भी अलंकार दीर्घा में अवलोकनार्थ प्रस्तुत है। इन प्रिंट में ग्रामीण संस्कृति, प्रदेश की स्थापत्य कला, जेकेके के आर्किटेक्चर व प्राकृतिक सौंदर्य का चित्रण किया गया है।


स्फटिक दीर्घा में लगी कला संग्रह प्रदर्शनी कला अनुरागियों को इतिहास के झरोखे से प्रदेश की समृद्ध कला से रूबरू करवा रही है। यहां 50 कलाकृतियां व 40 से अधिक पेंटिंग्स प्रदर्शित की गयी है। गाड़िया लोहार द्वारा आदिवासी अंचल की संस्कृति को दर्शाने वाली लोहे से बनी कलाकृतियां प्रदर्शनी में आगंतुकों का स्वागत करती हैं। केन्द्र की ओर से प्रकाशित ‘ट्रिस्ट विद ट्रेडिशन’ किताब यहां उपलब्ध है जिससे यहां प्रदर्शित कलाकृतियों के साथ-साथ प्रदेश की विभिन्न हस्तकलाओं की जानकारी हासिल कर सकते हैं। यहां मेटल वर्क, क्ले वर्क, वुड वर्क से जुड़ी कलाकृतियां प्रदर्शित की गयी है। इनमें 20वीं सदी में प्रचलित ब्रास के मिनाकारी किए थाल, मारोरी वर्क वाले प्लेंटर, चरु, उगालदान, कॉपर और पीतल के बर्तन आदि का अवलोकन कर सकते हैं। मोलेला पॉटरी से बनी कलाकृतियां और लकड़ी की कावड़ जिस पर लोक कथाएं अंकित हैं, पेपरमेशी से बना कोठ्यार जिसे पुराने समय में सामान स्टोर किया जाता था आदि हमें ग्रामीण अंचल की संस्कृति से साक्षात्कार करवाती है। केन्द्र की ओर से आयोजित आर्ट कैंप में तैयार पेंटिंग्स पारंपरिक लघु चित्रण और राजस्थानी संस्कृति को दर्शा रही हैं।
