जयपुर। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में पुलिस मुख्यालय में महिला सुरक्षा, महिला संबंधित अपराधों और सामाजिक चुनौतियों पर एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित कर विस्तृत मंथन किया गया। राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती विजया रहाटकर की अध्यक्षता में आयोजित इस समीक्षा बैठक में महानिदेशक पुलिस श्री राजीव कुमार शर्मा तथा अन्य वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ महिला सुरक्षा संबंधी नवाचारों, महिला अपराध नियंत्रण के लिए किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा करते हुए विभिन्न मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की।
बढ़ती रिपोर्टिंग: जागरूकता और सकारात्मक बदलाव का प्रतीक
बैठक के दौरान महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती रहाटकर ने बताया कि हालिया प्रस्तुतिकरण में महिलाओं से जुड़े अपराधों के आंकड़ों में गिरावट देखने को मिली है, जो एक सकारात्मक संकेत है। उन्होंने कहा कि कुछ श्रेणियों में महिलाओं द्वारा शिकायत दर्ज कराने की प्रवृत्ति बढ़ी है, जो समाज में कानून के प्रति बढ़ती जागरूकता और महिलाओं के बढ़ते आत्मविश्वास को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यदि रिपोर्टिंग बढ़ रही है तो इसे नकारात्मक नहीं बल्कि एक स्वस्थ सामाजिक बदलाव के रूप में देखा जाना चाहिए, क्योंकि महिलाएं अब अपने अधिकारों के लिए खुलकर सामने आ रही हैं।
उन्होंने अपराध के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि महिलाओं के विरुद्ध दर्ज मामलों में वर्ष 2024, 2025 और 2026 के हालिया आंकड़ों में सुधार दिखाई दे रहा है जो कि पुलिस और प्रशासन के समर्पित प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने साइबर अपराधों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन मामलों में केवल महिलाओं के खिलाफ अपराध ही नहीं बल्कि बड़े पैमाने पर वित्तीय धोखाधड़ी भी शामिल होती है, जिसके लिए कड़ी निगरानी और सतर्कता आवश्यक है।
इस अवसर पर राजस्थान पुलिस द्वारा राज्य और जिला स्तर पर राष्ट्रीय महिला आयोग के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की पहल की सराहना की गई। रहाटकर ने कहा कि पुलिस और आयोग के बीच संवाद और समन्वय बढ़ने से महिला सुरक्षा के मामलों में बेहतर परिणाम सामने आ सकते हैं।
थानों में काउंसलिंग की भूमिका अहम
आयोग अध्यक्ष रहाटकर ने महिला सशक्तिकरण के लिए जमीनी स्तर पर काम करने वाली आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं को कानूनी प्रशिक्षण देने का भी प्रस्ताव रखा गया, ताकि वे ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक कर सकें। इसके साथ ही थानों में एनजीओ काउंसलर्स की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया गया, जो कई मामलों में पुलिस कार्रवाई से पहले विवादों को सुलझाने और पीड़ित महिलाओं को मनोवैज्ञानिक तथा कानूनी सहायता प्रदान करने का कार्य करती हैं।
महिला सुरक्षा प्राथमिकता-केस ऑफिसर स्कीम से मजबूत कार्रवाई
बैठक के आरंभ में महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा ने कहा कि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ समय में महिला अपराधों में लगातार कमी आई है और पुलिस अनुसंधान की प्रक्रिया में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने कहा कि संवेदनशील मामलों को ‘केस ऑफिसर स्कीम’ के तहत लिया जा रहा है, ताकि अपराधियों को शीघ्र और सख्त सजा दिलाई जा सके तथा मामलों की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित हो सके। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि जयपुर पुलिस द्वारा चलाए गए ‘सशक्त नारी, जिम्मेदारी हमारी’ अभियान जैसे नवाचारों के माध्यम से महिलाओं में सुरक्षा और जागरूकता को बढ़ावा दिया जा रहा है।
पीड़ितों को राहत पहुंचाने पर जोर
राष्ट्रीय महिला आयोग के सदस्य सचिव सुदीप जैन ने भी महिला संबंधित अपराधों में कमी की स्थिति को अच्छा बताया और कहा कि पीड़ितों को वास्तविक राहत दिलाने के लिए पुलिस और आयोग को मिलकर और अधिक प्रभावी प्रयास करने होंगे। उन्होंने पुलिस विभाग से महिला सुरक्षा के क्षेत्र में नीतिगत निर्णयों और विभागीय नवाचारों के लिए सुझाव भी आमंत्रित किए।
बैठक के आरंभ में एडीजी, सिविल राईट लता मनोज कुमार और एसपी हर्षवर्धन अगरवाला ने पावर प्वाइंट प्रजेंटेशन के माध्यम से राज्य में महिला अपराधों की स्थिति, किए जा रहे प्रयास, लंबित प्रकरण इत्यादि के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस दौरान डीजी ट्रेफिक अनिल पालीवाल सहित समस्त वरिष्ठ पुलिस अधिकारी मौजूद रहे।
पुलिस मुख्यालय में हुआ महिला सुरक्षा पर मंथन: महिला अपराधों में गिरावट अच्छा संकेत
