प्रकरणों के क्वालिटी डिस्पोजल और पारदर्शिता पर जेडीसी का विशेष जोर
जयपुर। जयपुर विकास आयुक्त सिद्धार्थ महाजन ने सोमवार को जेडीए के मंथन सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में नागरिकों को प्रदत्त की जा रही सेवाओं को सुदृढ़ बनाने और प्रशासनिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए कई अहम निर्णय लिए। बैठक में जेडीए के सभी प्रकोष्ठों के कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई।
जेडीसी महाजन ने आमजन की सुविधा के लिए ई-जनसुनवाई सेवा शीघ्र शुरू करने के निर्देश दिये। इस नवाचार के तहत आमजन को अब अपनी शिकायतों और समस्याओं के लिए जेडीए कार्यालय आने की आवश्यकता नहीं होगी। नागरिक किसी भी स्थान से जेडीए अधिकारियों के समक्ष अपनी समस्या रख सकेंगे। इस व्यवस्था में शिकायतकर्ता को एसएमएस या वॉट्सऐप पर एक लिंक भेजा जाएगा, जिसके माध्यम से वे संबंधित जेडीए अधिकारियों से ऑनलाइन जुड़कर संवाद कर सकेंगे। इससे नागरिकों के समय की बचत होगी और समस्याओं का त्वरित व गुणात्मक समाधान सुनिश्चित होगा।
महाजन ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि लक्ष्य केवल पेंडेंसी को शून्य करना नहीं, बल्कि प्रकरणों का क्वालिटी डिस्पोजल (गुणवत्तापूर्ण निस्तारण) होना चाहिए। उन्होंने कहा कि नागरिक सेवा केंद्र के माध्यम से प्राप्त होने वाले लीजहोल्ड, नाम हस्तांतरण, लीज मुक्ति प्रमाण पत्र और उप-विभाजन/पुनर्गठन जैसे प्रकरणों का निस्तारण समय-सीमा में और संतोषप्रद तरीके से किया जाए, जिससे नागरिकों को बेहतर सेवाएं मिल सकें।
कार्यप्रणाली में पूर्ण पारदर्शिता लाने के लिए जेडीसी ने एक नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया। इसके तहत सेवानिवृत्त प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों एवं वरिष्ठ अधिकारियों को नियुक्त किया जाएगा, जो पिछले तीन माह में निस्तारित किए गए प्रकरणों की समीक्षा (ऑडिट) करेंगे। यह जांचा जाएगा कि निस्तारण समयबद्ध, नियमानुसार और गुणात्मक रूप से हुआ है या नहीं।
प्रशासनिक व्यवस्थाओं को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए जेडीसी ने निर्देश दिए कि आगंतुक अपनी शिकायतें सीधे जोन उपायुक्तों या प्रकोष्ठ प्रभारियों को ही प्रस्तुत करेंगे। जोन के अन्य अधीनस्थ अधिकारियों अथवा कर्मचारियों से सीधे मिलने पर पाबंदी रहेगी, जिससे कार्य निष्पादन में गति और सुधार आएगा। साथ ही, सभी जोन कार्यालयों को सीसीटीवी कैमरों से लैस किया जाएगा ताकि कार्यालयों की प्रभावी मॉनिटरिंग हो सके और अवांछित लोगों की पहचान कर उन पर रोक लगाई जा सके।
बैठक में डीटीएस, राजस्थान संपर्क पोर्टल, मुख्यमंत्री जनसुनवाई, लोकायुक्त, मानवाधिकार आयोग और विधानसभा प्रश्नों सहित राइजिंग राजस्थान से संबंधित प्रकरणों की भी समीक्षा की गई। जेडीसी ने निर्देश दिए कि अतिक्रमण, बिल्डिंग प्लान, ले-आउट प्लान, भू-उपयोग परिवर्तन और माननीय जनप्रतिनिधियों से प्राप्त शिकायतों का श्रेणीवार वर्गीकरण कर गुणात्मक निस्तारण किया जाए। बैठक में बताया गया कि सभी सेवाओं और प्रक्रियाओं के लिए प्रशासन द्वारा अलग-अलग एसओपी जारी की जाएगी, जिससे पूरी व्यवस्था पारदर्शी बनी रहे।
इसके अतिरिक्त, डिजिटाईलेजशन को बढ़ावा देने के लिए समस्त कार्यालयों को पत्रावलियों की सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए, जिससे फाइलों की ऑनलाइन स्कैनिंग प्रक्रिया को शीघ्र पूर्ण किया जा सकेगा।
जेडीए की नई पहलः अब घर बैठे होगी ई-जनसुनवाई
