तेहरान। ईरान ने इजराइल के बीर्शेबा शहर पर शुक्रवार सुबह बैलिस्टिक मिसाइल से हमला किया। टाइम्स ऑफ इजराइल की रिपोर्ट के मुताबिक मिसाइल माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस के नजदीक गिरी। इससे कई कारों में आग लग गई। आस-पास के घरों को भी नुकसान पहुंचा। इसमें 6 लोग घायल हो गए हैं।
यह लगातार दूसरा दिन है, जब बीर्शेबा शहर पर मिसाइल हमला हुआ है। इससे पहले गुरुवार को भी ईरान ने बीर्शेबा के एक अस्पताल पर मिसाइल दागी थी, जिसमें 50 से ज्यादा लोग घायल हो गए थे। अमेरिका का मानना है कि ईरान अब परमाणु हथियार बनाने की पूरी क्षमता रखता है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने गुरुवार को कहा कि अगर ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई आदेश दे दें, तो ईरान कुछ ही हफ्तों में परमाणु बम बना सकता है।
लेविट ने कहा कि ईरान के पास परमाणु हथियार बनाने के लिए जरूरी हर चीज मौजूद है। अब बस उन्हें अपने नेता के हां कहने भर की देर है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर ईरान ऐसा करता है, तो इससे सिर्फ इजराइल नहीं, बल्कि अमेरिका और पूरी दुनिया की सुरक्षा को खतरा होगा।
7 दिन की लड़ाई में अब तक इजराइल के 24 लोग मारे गए हैं, जबकि 600 से ज्यादा लोग घायल हैं। वहीं, वॉशिंगटन स्थित एक ह्यूमन राइट्स ग्रुप ने दावा किया है कि ईरान में मौत का आंकड़ा अब 639 हो चुका है और 1329 लोग घायल हैं।
अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख राफेल ग्रॉसी ने यह साफ कहा है कि उनकी संस्था की हालिया रिपोर्ट और ईरान की परमाणु गतिविधियों पर की गई टिप्पणियों का इजराइल के हमले से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने CNN को दिए इंटरव्यू में कहा कि उनकी रिपोर्ट किसी सैन्य कार्रवाई का आधार नहीं बन सकती, क्योंकि कोई भी हमला एक राजनीतिक फैसला होता है, न कि यह IAEA जैसी एजेंसी की राय पर आधारित होता है।
ईरान ने पहले आरोप लगाया था कि IAEA की रिपोर्ट और उसकी टिप्पणियों ने इजराइल को हमले के लिए ‘जमीन तैयार’ कर दी, लेकिन ग्रॉसी ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में जो बातें कही गई थीं, वे नई नहीं थीं। IAEA पहले से ही चेतावनी देता रहा है कि ईरान अपनी परमाणु गतिविधियों से जुड़ी जानकारी साझा नहीं कर रहा। जब उनसे पूछा गया कि ईरान कितनी जल्दी परमाणु हथियार बना सकता है, तो उन्होंने कहा कि सिर्फ यूरेनियम जमा कर लेना एक बात है, जो कि ईरान के पास फिलहाल नौ बमों जितना है। लेकिन उसे हथियार के रूप में तैयार करना एक अलग और जटिल प्रक्रिया है।
उन्होंने यह भी दोहराया कि दुनिया में ईरान ही एकमात्र ऐसा देश है, जो परमाणु हथियार नहीं रखता फिर भी इतना अधिक यूरेनियम संवर्धित कर रहा है। लेकिन उन्होंने यह भी साफ किया कि समयसीमा जैसी कोई बात कहना फिलहाल सिर्फ अनुमान होगा, कोई पक्की जानकारी नहीं।
ऑस्ट्रेलिया ने ईरान की राजधानी तेहरान में स्थित अपना दूतावास बंद कर दिया है और अपने सभी अधिकारियों को देश छोड़ने का आदेश दिया है। सरकार ने कहा कि यह फैसला ईरान में सुरक्षा स्थिति के लगातार बिगड़ने की वजह से लिया गया है। ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग ने बताया कि यह फैसला आसान नहीं था, लेकिन मौजूदा हालात को देखते हुए जरूरी था। उन्होंने कहा कि दूतावास का काम फिलहाल के लिए रोक दिया गया है और सभी अधिकारी व उनके परिवार ईरान से बाहर निकल चुके हैं।
सरकार ने ईरान में मौजूद सभी ऑस्ट्रेलियाई नागरिकों से भी कहा है कि अगर संभव हो तो वे भी सुरक्षित तरीके से देश छोड़ दें। वोंग ने बताया कि इस समय करीब 2,000 ऑस्ट्रेलियाई नागरिक और उनके परिजन ईरान में हैं, जबकि 1,200 ऑस्ट्रेलियाई लोग इजराइल में हैं।
ऑस्ट्रेलिया उन कई देशों में शामिल हो गया है जिन्होंने इजराइल के ईरान मे परमाणु ठिकानों पर हमले के बाद अपने दूतावास बंद कर दिए हैं। इनमें बुल्गारिया, चेक रिपब्लिक, न्यूजीलैंड, पुर्तगाल और स्विट्जरलैंड जैसे देश भी शामिल हैं।
इजराइल में माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस के पास गिरी ईरानी मिसाइल, 6 लोग घायल
