जयपुर। राज्य सरकार की सुशासन की मंशा के अनुरूप जयपुर विकास प्राधिकरण द्वारा आमजन एवं हितधारकों से संबंधित प्रकरणों के निस्तारण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी एवं सुगम बनाने की दिशा में एक नई पहल प्रारम्भ की है।
जयपुर विकास आयुक्त सिद्धार्थ महाजन की अध्यक्षता में बुधवार को भवन मानचित्र समिति (बीपी) तथा गुरुवार को भवन मानचित्र समिति (ले-आउट प्लान) की बैठक जेडीए के मंथन सभागार में आयोजित की गई।
जेडीए द्वारा समिति की बैठकों की कार्यप्रणाली में सुधार करते हुए एक नई व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत अब भवन मानचित्र समिति (बीपी) एवं ले-आउट प्लान समिति की बैठकों में प्रस्तुत प्रकरणों के अनुमोदन के समय संबंधित विकासकर्ताओं, भवन निर्माताओं, आर्किटेक्ट्स एवं आवेदकों को भी बैठक में उपस्थित रहने का अवसर प्रदान किया जा रहा है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य जेडीए अधिकारियों एवं संबंधित आवेदकों के मध्य प्रत्यक्ष संवाद स्थापित करना है, जिससे प्रकरणों से संबंधित तकनीकी अथवा व्यावहारिक बिंदुओं का निराकरण बैठक के दौरान ही किया जा सके। इससे निर्णय प्रक्रिया अधिक स्पष्ट एवं समयबद्ध होगी।
जयपुर विकास आयुक्त सिद्धार्थ महाजन ने बताया कि जेडीए द्वारा अब प्रकरणों का निर्णय करते समय आवेदकों का पक्ष भी सुना जा रहा है। यह पहल जेडीए की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के साथ-साथ राज्य सरकार की सुशासन की नीति को प्रभावी रूप से लागू करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे प्रकरणों के शीघ्र निस्तारण के साथ आमजन का विश्वास भी सुदृढ़ होगा।
बुधवार को भवन मानचित्र समिति (बीपी) की बैठक में 8 प्रकरण रखे गये, जिनमें से 4 प्रकरणों का नियमानुसार अनुमोदन किया गया तथा गुरुवार को भवन मानचित्र समिति (ले-आउट प्लान) की बैठक में 18 प्रकरण रखे गये, जिनमें से 8 प्रकरणों का नियमानुसार अनुमोदन किया गया। बैठक में जेडीए सचिव, निदेशक (योजना), अतिरिक्त आयुक्त (एलपीसी/पीआरएन), संबंधित जोन उपायुक्त, अतिरिक्त मुख्य नगर नियोजक सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
जेडीए में पारदर्शिता की दिशा में नई पहल: भवन मानचित्र (बीपी) एवं ले-आउट प्लान (एलपी) समिति की बैठकों में अब आवेदकों को भी सुनवाई का अवसर
